विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र को संबोधित करते हुए एक ओर जहां विश्व के ताकतवर देशों को इशारों ही इशारों में वास्तवकिता का अहसास कराया, वहीं दूसरी ओर भारत की कुटनीतिक उपलब्धियों को भी दुनिया के सामने रखा। विदेश मंत्री ने UNGA को संबोधित करते हुए कहा कि एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' का भारत का दृष्टिकोण महज कुछ देशों के संकीर्ण हितों पर नहीं, बल्कि कई राष्ट्रों की प्रमुख चिंताओं पर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास करता है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में गिनाईं भारत की कुटनीतिक उपलब्धियां
'वे दिन खत्म...'
अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में आयोजित UNGA में बोलते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ताकतवर देशों को आइना भी दिखाया। एस. जयशंकर ने कहा- "ऐसे समय में जब पूर्व-पश्चिम ध्रुवीकरण इतना तीव्र है और उत्तर-दक्षिण विभाजन इतना गहरा है, नई दिल्ली शिखर सम्मेलन भी इस बात की पुष्टि करता है कि कूटनीति और संवाद ही एकमात्र प्रभावी समाधान हैं... वे दिन खत्म हो गए हैं जब कुछ देश एजेंडा तय करते थे और दूसरों से उसके अनुरूप चलने की उम्मीद करते थे।"
G-20 का जिक्र कर UN में बदलाव की मांग
आगे भारत में आयोजित हुए जी20 शिखर सम्मेलन की उपलब्धियों को गिनाते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की पहल की वजह से G-20 में अफ्रीकन यूनियन को स्थाई सदस्यता मिली है। ऐसा करके हमने पूरे महाद्वीप को एक आवाज दी, जिसका काफी समय से हक रहा है। इस महत्वपूर्ण कदम से संयुक्त राष्ट्र, जो उससे भी पुराना संगठन है, सुरक्षा परिषद को समसामयिक बनाने के लिए प्रेरित होना चाहिए।
भारत की कूटनीतिक उपलब्धियां
आगे विदेश मंत्री में एस. जयशंकर ने कहा कि भारत विविध साझेदारों के साथ सहयोग को बढ़ावा देना चाहता है। गुटनिरपेक्षता के युग से, अब हम 'विश्व मित्र - दुनिया के लिए एक मित्र' के युग में विकसित हो गए हैं। यह विभिन्न देशों के साथ जुड़ने और जहां आवश्यक हो, हितों में सामंजस्य स्थापित करने की हमारी क्षमता और इच्छा में परिलक्षित होता है। यह QUAD के तीव्र विकास में दिखाई देता है; यह BRICS समूह के विस्तार या I2U2 के उद्भव में भी समान रूप से स्पष्ट है।
