S Jaishankar in Quad Meeting: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद सर्वदलीय शिष्टमंडल की तारीफ करते हुए कहा कि विपक्ष के सदस्यों ने दुनिया को एक एकजुटता का संदेश दिया। इसके लिए एक मंत्री के रूप में नहीं बल्कि एक भारतीय नागरिक के रूप में उन्हें गर्व है। वॉशिंगटन डीसी में अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के अपने समकक्षों के साथ क्वाड बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में जयशंकर ने कहा कि चूंकि विभिन्न दलों के सांसदों ने इस वैश्विक प्रयास में भाग लिया, इसलिए यह भारत की 'राजनीतिक बहुलता' थी जो एक साझा राष्ट्रीय हित के लिए एकजुट हुई, और यह एक शानदार पहल थी।
वाशिंगटन डीसी में प्रेस को संबोधित करते विदेश मंत्री एस जयशंकर।
'भारत ने सिद्धांत आधारित रुख अपनाया है'
आतंकवाद पर अपनी बात रखते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि 'यह एक तथ्य है कि अक्सर देश तब कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाते जब किसी और देश पर आतंकवादी हमला होता है, जबकि जब वही बात उनके साथ होती है तो वे कड़ी प्रतिक्रिया देते हैं। इस मामले में, ईमानदारी से कहूं तो हमने हमेशा एक सुसंगत और सिद्धांत आधारित रुख अपनाया है। जब भारत के बाहर कहीं आतंकी हमले होते हैं, तब भी हमने वही रुख अपनाया है जो हमने भारत में हुए हमलों के समय अपनाया।'
जयशंकर ने कहा कि उनमें से कई देश ऐसा नहीं कर रहे हैं या पर्याप्त रूप से नहीं कर रहे हैं, और कूटनीति का एक हिस्सा यह भी होता है कि हम उन्हें इसके लिए प्रेरित करें, प्रोत्साहित करें, मनाएं और सहयोग के लिए तैयार करें। इसी वजह से अपनी बात कहना जरूरी है और उन्हें साथ लेकर चलना भी जरूरी है ताकि हम सर्वोत्तम संभव समर्थन हासिल कर सकें।
'ऑपरेशन सिंदूर' की तारीफ की
विदेश मंत्री ने कहा, 'बातचीत और उनका प्रभाव हमारे देश के लिए बहुत फायदेमंद रहा। इसने वास्तव में हमारे राष्ट्रीय हित की सेवा की। जब एक व्यापक प्रतिनिधित्व वाला समूह विदेश में एक स्वर में बात करता है, तो यह राष्ट्रीय एकता का एक सशक्त संदेश देता है।' उन्होंने कहा कि हाल ही में सात बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल 30 से अधिक देशों की यात्रा पर गए, ताकि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारत के आतंकवाद के खिलाफ मजबूत रुख को उजागर किया जा सके। प्रत्येक समूह ने दुनिया की प्रमुख राजधानियों का दौरा किया ताकि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ता को रेखांकित और वैश्विक शांति के प्रति देश की प्रतिबद्धता को मजबूती से दोहराया जा सके।
विपक्ष के नेताओं ने मजबूती से रखी भारत की बात
जयशंकर ने आगे कहा, 'जब आपके पास शशि थरूर, सुप्रिया सुले, कनिमोझी जैसे विपक्षी नेताओं के साथ-साथ सत्तारूढ़ गठबंधन से रविशंकर प्रसाद, जय पांडा या संजय झा जैसे नेता होते हैं; सलमान खुर्शीद, अनिल शर्मा, गुलाम नबी आजाद जैसे लोग जो पहले विदेश मामलों में अनुभव रखते हैं, तो मैं इसे राजनीतिक बहुलता कहता हूं जो भारत के लिए एकजुट होती है और एक मजबूत संयुक्त संदेश देती है।' इस वैश्विक संपर्क अभियान में 50 से अधिक लोग शामिल थे, जिनमें वर्तमान और पूर्व सांसद तथा पूर्व राजनयिक शामिल थे। जिन नेताओं ने प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व किया, उनमें बीजेपी के रविशंकर प्रसाद और बैजयंत पांडा, कांग्रेस के सांसद शशि थरूर, जदयू के संजय झा, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे, डीएमके की कनिमोझी और एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले शामिल थे।
पहलगाम हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई
सरकार द्वारा असदुद्दीन ओवैसी (एआईएमआईएम), मनीष तिवारी (कांग्रेस) और प्रेम चंद गुप्ता (राजद) जैसे सांसदों को शामिल कर प्रतिनिधिमंडलों को समावेशी बनाने के फैसले को राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे पर एक संयुक्त मोर्चा पेश करने के प्रयास के रूप में देखा गया। 'ऑपरेशन सिंदूर' वैश्विक संपर्क कार्यक्रम का उद्देश्य यह स्पष्ट करना था कि पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सैन्य कार्रवाई उकसावे वाली नहीं थी, बल्कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत के जवाब में की गई प्रतिक्रिया थी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आतंकवाद के खिलाफ भारत की ज़ीरो टॉलरेंस नीति को दुनिया के सामने स्पष्ट करना भी था।
