अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में प्रस्तावित शांति वार्ता पर अनिश्चितता गहराती जा रही है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक,दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाएं तेजी से खत्म होती दिख रही हैं क्योंकि तेहरान फिलहाल अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मिलने के लिए तैयार नहीं है। वहीं, इस बैठक से पहले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक जारी है।
शहबाज शरीफ और अब्बास अराघची के बीच वार्ता।
क्यों अटकी बातचीत
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने बातचीत शुरू करने के लिए एक सख्त शर्त रखी है। उसने कहा है कि पहले होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नौसेना द्वारा लगाए गए प्रतिबंध या नाकेबंदी को हटाया जाए,इसके बाद ही वह वार्ता के बारे में आगे बढ़ेगा।
वार्ता में कौन-कौन शामिल
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विशेष दूत स्टीव विटकॉफ कर रहे हैं,जबकि उनके साथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार जेरेड कुशनर भी शामिल हैं। इसके अलावा, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अलर्ट मोड में हैं। अगर वार्ता में कुछ प्रगति होती है तो वे इस्लामाबाद पहुंचेंगे। वहीं, ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची पहले ही इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं,जिससे शुरुआत में बातचीत की उम्मीद जगी थी।
शहबाज शरीफ और अब्बास अराघची की बैठ जारी
वहीं, इस बैठक से पहले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक जारी है। इसके लिए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची प्रधानमंत्री आवास पहुंचे थे। इस बैठक में प्रधानमंत्री के साथ उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री सीनेटर मुहम्मद इशाक डार और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी शामिल हैं।
पहले दौर में भी नहीं निकला था हल
इससे पहले इस्लामाबाद में 21 घंटे तक चली पहले दौर की वार्ता भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। उस दौर में अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व जेडी वेंस ने किया था, जबकि ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गलीबॉफ शामिल थे। इस संभावित वार्ता के मद्देनजर इस्लामाबाद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम किया गया है। शहर के कई प्रमुख रास्तों को बंद कर दिया गया है। इतना ही नहीं हाई-सिक्योरिटी रेड जोन को भी पूरी तरह सील कर दिया गया है।
मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कूटनीतिक समाधान की राह फिलहाल आसान नहीं है। यदि ईरान और अमेरिका अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहते हैं,तो इस वार्ता के टलने या पूरी तरह रद्द होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
