पाकिस्तान ने ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब की रक्षा करने के लिए हर उपलब्ध साधन का उपयोग करने का संकल्प लिया है। इटली की राजधानी रोम के दौरे पर पहुंचे पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह स्पष्ट किया। इस बयान को मध्य पूर्व में फैलते क्षेत्रीय तनाव के बीच इस्लामाबाद के सीधे सैन्य जुड़ाव के सबसे बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
आसिफ ख्वाजा का हूतियों के हमले पर नया बयान
'सऊदी का दुश्मन, पाकिस्तान का दुश्मन'
ख्वाजा आसिफ ने कड़े शब्दों में कहा, "सऊदी अरब का कोई भी दुश्मन, पाकिस्तान का दुश्मन है। यह बात पूरी तरह साफ होनी चाहिए।" रक्षा मंत्री ने बताया कि 7 अगस्त को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत किसी भी एक सदस्य देश पर हुआ हमला, तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
सैन्य अभियानों पर चुप्पी
यह पूछे जाने पर कि क्या पाकिस्तानी सेना ने यमन में हूती ठिकानों पर हालिया हवाई हमलों में भाग लिया है, आसिफ ने इसका सीधा जवाब देने से इनकार किया। हालांकि, उन्होंने दोहराया कि समझौते के तहत पाकिस्तान की सभी सैन्य क्षमताएं सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए उपलब्ध रहेंगी।
क्यों बढ़ा मध्य पूर्व में तनाव?
हूती विद्रोहियों ने यमन के रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा (Mokha) और लाल सागर के कई द्वीपों पर कब्जा कर लिया है। इससे 'बाब अल-मंदेब' (Bab el-Mandeb) जलडमरूमध्य पर खतरा बढ़ गया है, जहां से दुनिया का करीब 12% समुद्री व्यापार गुजरता है। हूतियों और उनके सहयोगी मिलिशिया ने हाल के हफ्तों में सऊदी अरब के तेल ठिकानों और टैंकरों को निशाना बनाकर मिसाइल व ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। इस स्थिति पर चर्चा के लिए हाल ही में रियाद में पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के सेना प्रमुखों की एक अहम बैठक भी हुई थी।
परमाणु हथियार और नई सुरक्षा संरचना
यह त्रिपक्षीय गठबंधन बेहद शक्तिशाली है क्योंकि इसमें तेल समृद्ध सऊदी अरब, नाटो सदस्य तुर्की और परमाणु संपन्न पाकिस्तान शामिल हैं। रक्षा मंत्री ख्वाजा ने अपने बयान में परमाणु हथियारों का कोई जिक्र नहीं किया, लेकिन उन्होंने कहा कि तीनों देश फिलहाल इस गठबंधन का सचिवालय और ऑपरेशनल ढांचा तैयार कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि खाड़ी क्षेत्र में मौजूदा सुरक्षा व्यवस्थाएं विफल रही हैं, जिसके कारण इस नए त्रि-पक्षीय मोर्चे को आकार देना पड़ा।
ईरान के साथ रिश्तों पर रुख
ईरान के साथ पाकिस्तान के संबंधों पर बोलते हुए ख्वाजा आसिफ ने माना कि हूती और कुछ इराकी मिलिशिया अब काफी हद तक स्वायत्त हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि कुछ प्रॉक्सी समूह बेलगाम हो जाते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सैन्य प्रतिबद्धता के बावजूद पाकिस्तान ईरान के साथ अपने राजनयिक संबंध बनाए हुए हैं और मध्य पूर्व में जारी व्यापक संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत व शांति वार्ताओं का समर्थन करता है। अब देखना है कि आसिफ ख्वाजा के बयान के बाद हूतियों के हमले पर पाकिस्तान का रुख क्या रहता है। अब तक पाकिस्तान ने सिर्फ कोरी बयानबाजी ही की हैै।
