पिछले कुछ हफ्ते पहले पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर तनाव चरम पर पहुंच गया था। दोनों तरफ से हवाई हमले हुए थे। अफगानिस्तान ने दावा किया कि संघर्ष में कई पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हो गई। वहीं, कई पाकिस्तानी सेना के बंकर पर तहरीक ए तालिबान (पाकिस्तान) ने कब्जा कर लिया। वहीं, पाकिस्तान ने टीटीपी के लड़ाकों पर जबरदस्त हमले किए।
सीजफायर को लेकर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तुक्रिये में चल रही वार्ता।(फोटो सोर्स: AP)
तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधि तुर्कियें पहुंच चुके हैं। टोलो न्यूज के अनुसार, अफगानिस्तान की ओर से इस्लामिक अमीरात के उप गृह मंत्री रहमतुल्लाह नजीब के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल वार्ता में शामिल है।
वार्ता में कौन-कौन होंगे शामिल?
अफगान प्रतिनिधिमंडल में सुहैल शाहीन (कतर में अफगानिस्तान के कार्यवाहक राजदूत), अनस हक्कानी (इस्लामिक अमीरात के वरिष्ठ सदस्य), नूर अहमद नूर (विदेश मंत्रालय में राजनीतिक मामलों के महानिदेशक), नूरुल रहमान नुसरत (रक्षा मंत्रालय में उप संचालन प्रमुख) और अब्दुल क़हर बल्खी (विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता) शामिल हैं। पाकिस्तान की ओर से सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल वार्ता में भाग ले रहा है, जिसमें राजनयिक और खुफिया अधिकारी शामिल हैं।
टोলো न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत चार प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित है:
शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को रोकने के लिए निगरानी तंत्र स्थापित करना।
राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए मौजूदा कानूनों को लागू करना।
पिछले दो दशकों से पाकिस्तान की सुरक्षा चुनौतियों के मूल कारणों की समीक्षा करना।
व्यापारिक बाधाओं और अफगान शरणार्थियों की जबरन वापसी के मुद्दों पर चर्चा करना।
राजनीतिक विश्लेषक फजल मनन मुनताज ने कहा कि दोहा बैठक के बाद इस्तांबुल वार्ता से यह स्पष्ट होता है कि अफगानिस्तान की नीति संवाद और कूटनीति के जरिए विवादों को सुलझाने की है।
उन्होंने कहा, “इस्लामिक अमीरात यह दिखाना चाहता है कि वह अपने सभी आंतरिक और बाहरी मुद्दों को बातचीत से हल करना चाहता है।”
इस बीच, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अगर वार्ता विफल रहती है, तो “हमारे पास अन्य विकल्प मौजूद हैं। यदि बातचीत का परिणाम नहीं निकला, तो सीधी टकराव की स्थिति भी बन सकती है।” आसिफ ने बताया कि “वार्ता दो से तीन घंटे पहले शुरू हुई है, और इसके नतीजे आज रात या कल तक सामने आ सकते हैं।”
पाकिस्तान की मंशा पर अफगानिस्तान को संदेह
पूर्व अफगान राजनयिक अमीर मोहम्मद घरान ने पाकिस्तान की मंशा पर संदेह जताया है। उन्होंने कहा, “यह अच्छा है कि बातचीत जारी है, लेकिन हमें पाकिस्तान की नीयत पर भरोसा नहीं है। पिछले अनुभवों में उन्होंने पारदर्शिता नहीं दिखाई।”
इससे पहले अफगान उप प्रधानमंत्री (आर्थिक मामलों) मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने कहा था कि “क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए ईमानदार संवाद और सहयोग जरूरी है।” पाकिस्तानी अधिकारियों ने भी इसी भावना को दोहराया और कहा कि “विवादों के जिम्मेदार प्रबंधन से ही स्थायी समाधान संभव है।”
