Nepal Flash Flood: नेपाल में आई तबाही को एक हफ्ता होने वाला है। 26 अगस्त को आई इस आपदा के बाद खबर लिखे जाने तक नेपाल में 987 लोगों की मौत की जानकारी सामने आ चुकी है। वहीं, हजारों लोग अभी भी लापता हैं। इस त्रासदी में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सबसे बड़ी चुनौती अब बरामद शवों की पहचान को लेकर सामने आ रही है। बड़ी संख्या में शव कई दिनों तक पानी और मलबे में पड़े रहने के कारण खराब हो चुके हैं। ऐसे में प्रशासन ने अज्ञात शवों को दफनाने का फैसला किया है, लेकिन इससे पहले उनकी पहचान से जुड़ी तमाम जानकारियां और डीएनए सैंपल सुरक्षित किए जा रहे हैं।
नेपाल में आई बाढ़ की वजह से अब तक 900 से ज्यादा लोगों की मौत।
चितवन में अज्ञात शवों को दफनाने का फैसला
नेपाल के चितवन जिले में बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। इनमें से अधिकांश की पहचान नहीं हो सकी है। प्रशासन के मुताबिक, शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना मुश्किल हो रहा था और उनके सड़ने से संक्रमण तथा महामारी का खतरा बढ़ रहा था। इसी वजह से पहचान संबंधी रिकॉर्ड और DNA सैंपल सुरक्षित करने के बाद शवों को सम्मानपूर्वक दफनाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
चितवन प्रशासन के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, 233 शव बरामद हुए थे, लेकिन इनमें केवल 8 की पहचान हो सकी थी। बाकी 225 शवों को सुरक्षित रखने के लिए अस्पतालों और होल्डिंग सेंटरों में रखा गया था। बाद की रिपोर्टों में बरामद शवों और पहचान के आंकड़े बढ़े हैं, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
क्यों जरूरी हुआ शवों को दफनाना?
प्रशासन के सामने एक तरफ लापता लोगों के परिवारों को उनके परिजनों की जानकारी देने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ सैकड़ों शवों को सुरक्षित रखने की समस्या है। शवों को लंबे समय तक मोर्चरी या खुले स्थान पर रखना संभव नहीं था। बढ़ते तापमान और कई दिनों तक पानी में पड़े रहने के कारण शव तेजी से खराब हो रहे थे।
ऐसे में प्रशासन ने डीएनए और पहचान संबंधी रिकॉर्ड सुरक्षित करने के बाद शवों को दफनाने का रास्ता चुना है। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य शवों की पहचान के अधिकार को खत्म करना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित तरीके से संरक्षित करना है ताकि भविष्य में DNA मिलान होने पर परिवारों को उनके परिजन के बारे में पुष्टि की जा सके।
कब्रों का भी रखा जा रहा है पूरा रिकॉर्ड
अज्ञात शवों को दफनाने के दौरान उनकी लोकेशन और पहचान संख्या का रिकॉर्ड रखा जा रहा है। कुछ स्थानों पर GPS के जरिए कब्र की स्थिति दर्ज की जा रही है। कब्रों के पास यूनिक नंबर वाले मार्कर लगाए जा रहे हैं और दफनाने की प्रक्रिया की तस्वीरें व वीडियो भी रिकॉर्ड किए जा रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद यही है कि यदि आने वाले दिनों या महीनों में किसी लापता व्यक्ति के परिवार का DNA किसी शव से मैच होता है, तो प्रशासन उस शव की सही जगह तक पहुंच सके और परिवार को अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने का मौका मिल सके।
शवों को सीधे दफनाया नहीं जा रहा
प्रशासन ने साफ किया है कि अज्ञात शवों को बिना किसी रिकॉर्ड के दफन नहीं किया जा रहा। हर शव से डीएनए सैंपल लिया जा रहा है। इसके अलावा शव की तस्वीरें, पहचान से जुड़ी जानकारी और एक यूनिक पहचान संख्या दर्ज की जा रही है। दफनाए जाने के बाद भी शव की पहचान संभव हो सके, इसके लिए कब्र की लोकेशन का रिकॉर्ड रखा जा रहा है। कई जगहों पर शवों के साथ पहचान टैग लगाए जा रहे हैं और कब्र के पास भी यूनिक नंबर वाला मार्कर लगाया जा रहा है। इससे भविष्य में यदि किसी परिवार के DNA का मिलान होता है तो संबंधित शव को ढूंढने में मदद मिल सकेगी।
परिवारों से भी लिए जा रहे डीएनए सैंपल
लापता लोगों के परिजनों से भी डीएनए सैंपल लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इन सैंपलों को बरामद शवों से लिए गए डीएनए के साथ मिलाया जाएगा। अगर किसी शव का डीएनए किसी लापता व्यक्ति के परिवार से मैच होता है, तो प्रशासन उसके रिकॉर्ड के आधार पर शव की पहचान कर सकेगा।
