Nepal Flash Flood: नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद पैदा हुए संकट के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों को बचाने और पड़ोसी देश की मदद के लिए बड़े पैमाने पर कदम उठाए हैं। विदेश मंत्रालय ने अपने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस संबंध में कई बातें बताईं। MEA के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में इस पूरे घटनाक्रम और चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में विस्तृत जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार, बाढ़ के कारण चीन की तरफ फंसे लगभग 400 भारतीय नागरिक पूरी तरह से सुरक्षित हैं।
चीन सीमा पर फंसे 400 भारतीय सुरक्षित
वे लगातार अपने परिवारों के संपर्क में हैं। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास वहां के स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर इन सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की योजना पर काम कर रहा है। इसके अलावा, चीन की तरफ फंसे 96 अन्य भारतीय नागरिक भी सड़क मार्ग के जरिए सुरक्षित नेपाल की सीमा में दाखिल हो चुके हैं। राहत की एक और बड़ी खबर यह है कि नेपाल के प्रभावित इलाकों से रेस्क्यू किए गए तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिक काठमांडू के रास्ते सुरक्षित दिल्ली पहुंच चुके हैं।
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100 भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों से भी संपर्क करने की कोशिश
इससे पहले त्रिशूली-वन जलविद्युत परियोजना (Trishuli One Hydropower Project) में काम कर रहे 63 भारतीय कर्मचारियों को भी सकुशल बाहर निकाल लिया गया था। हालांकि, सरकार के लिए अभी भी सबसे बड़ी चिंता 320 लापता भारतीय नागरिकों की है, जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए करीब 100 भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों से भी संपर्क साधने की कोशिशें जारी हैं।
नेपाल में बिगड़े हालात को देखते हुए भारत ने तुरंत मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाया है। तबाही वाले दिन ही यानी 26 अगस्त की शाम को 10 टन राहत सामग्री लेकर पहला विमान रवाना किया गया था, जिसमें दवाएं, टेंट, कंबल और सोलर लैंप शामिल थे। इसके बाद 27 अगस्त को 37.5 टन सामग्री के साथ दूसरी फ्लाइट भेजी गई, जिसमें बड़े जनरेटर, वाटर पंप और खाना भेजा गया।
राहत सामग्री के साथ तीसरी फ्लाइट भी जाने को तैयार
विदेश मंत्रालय नेपाल की मांग के अनुसार लगातार मदद भेज रहा है और 12 से 13 टन अतिरिक्त राहत सामग्री के साथ तीसरी फ्लाइट भी रवाना की जा रही है। भारत सरकार का कहना है कि जब तक आखिरी नागरिक सुरक्षित वापस नहीं आ जाता और नेपाल में स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक राहत और बचाव का यह कार्य बिना रुके जारी रहेगा। रणधीर जायसवाल ने कहा, “राहत सामग्री लेकर दो विमान पहले ही नेपाल भेजे जा चुके हैं। हमें उम्मीद है कि तीसरा विमान भी मानवीय सहायता लेकर नेपाल जाएगा। नेपाल के अनुरोध पर हम सुरंग बचाव दल भेजने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए पहले एक रेकी टीम भेजी जा रही है, जो मौके पर स्थिति का आकलन करेगी और बताएगी कि वहां किस तरह के उपकरणों की जरूरत होगी।
मदद के लिए जाएंगी मेडिकल और NDRF की टीमें-MEA
हम नेपाल में एक मेडिकल टीम भी भेज रहे हैं। इसके अलावा, हमने बैली ब्रिज और उससे जुड़ी तकनीकी टीम उपलब्ध कराने की पेशकश की है, ताकि नेपाल के प्रभावित इलाकों में संपर्क और आवाजाही जल्द बहाल की जा सके। हमने नेपाल सरकार को NDRF की टीमें और उनके जरूरी उपकरण भेजने की भी विशेष पेशकश की है। ये टीमें वहां चल रहे खोज एवं बचाव अभियानों में मदद करने के साथ-साथ आपदा से प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने में सहायक होंगी। अब हमें नेपाल सरकार के जवाब का इंतजार है। नेपाल के अधिकारियों को जिस भी सहायता की जरूरत होगी, भारत उसे उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।”
