'बाढ़ फिर से आ गई है'...रात में बार-बार चीख उठते हैं बच्चे; नेपाल में अब तक 987 की मौत, 4000 लापता

इस भीषण प्राकृतिक आपदा में अब तक 900 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 4,000 लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल सरकार ने राहत अभियान के साथ-साथ बड़े पैमाने पर मनो-सामाजिक परामर्श और राहत कार्यक्रम शुरू किया है।

Nepal Deadly Flood: नेपाल में आई एक दशक की सबसे विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने न केवल भारी तबाही मचाई है, बल्कि जीवित बचे लोगों के दिलों-दिमाग पर एक गहरा मानसिक आघात भी छोड़ दिया है। बाढ़ के खौफनाक मंजर के कारण बच्चे रात में डरावने सपने देखकर रोते हुए जाग रहे हैं, जबकि वयस्क तीव्र चिंता, पैनिक और अत्यधिक डर से जूझ रहे हैं। इस भीषण प्राकृतिक आपदा में अब तक 987 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 4,000 लोग अभी भी लापता हैं। 11,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, लेकिन सड़कें, पुल, मकान और पूरे के पूरे गांव तबाह हो चुके हैं। इस मानसिक संकट से निपटने के लिए नेपाल सरकार ने राहत अभियान के साथ-साथ बड़े पैमाने पर मनो-सामाजिक परामर्श और राहत कार्यक्रम शुरू किया है।

Flood Nepal

नेपाल में बाढ़ के बाद ट्रॉमा से गुजर रहे लोग (AI Image)

राहत अभियान और विशेषज्ञों की तैनाती

नेपाल सरकार ने सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा (Rasuwa) और नुवाकोट (Nuwakot) जिलों में 50 मनोचिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों और मनो-सामाजिक परामर्शदाताओं की टीमों को ग्राउंड पर उतारा है। स्वास्थ्य सेवा विभाग की वरिष्ठ सलाहकार पोमावती थापा के अनुसार, 10 विशेषज्ञ सीधे 'साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड' (PFA) प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा, सड़क संपर्क से पूरी तरह कट चुके रसुवा के सुदूर उत्तरगया क्षेत्र में 4 सदस्यीय विशेष टीम भेजी गई है। बागमती प्रांत में 64 अन्य प्रशिक्षित परामर्शदाताओं को स्टैंडबाय पर रखा गया है, ताकि लंबे समय तक चलने वाली मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

End of Feed