नासा ने एक और दुनिया का पहला ऐसा मिशन लॉन्च किया है, जिससे वो अंतरिक्ष में बेताज बादशाह बन जाएगा। नासा ने एक ऐसे क्षुद्रगाह पर अपने स्पेसक्राफ्ट भेजा है, जहां सोने और हीरे के भंडार होने की बात कही जा रही है। नासा का यह यान छह महीने की यात्रा करके इस एस्ट्रोयड पर पहुंचेगा और अपना काम करेगा।
नासा ने लॉन्च किया साइकी एस्ट्रोयड मिशन (फोटो- NASA)
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2029 तक पहुंचे यान
स्पेसएक्स ने नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से इस अंतरिक्ष यान को रवाना किया। इसका नाम उस क्षुद्रग्रह के नाम पर रखा गया है जिसका यह पीछा कर रहा है। मिशन टू साइकी (Mission To Psyche) नाम का यह मिशन 2029 में तक इस क्षुद्रग्रह पर पहुंचेगा।
क्या है इसकी खासियत
अब तक खोजे गए लगभग नौ धातु-समृद्ध क्षुद्रग्रहों में से, साइके सबसे बड़ा है, जो लाखों अन्य अंतरिक्ष चट्टानों के साथ मंगल और बृहस्पति के बीच मुख्य क्षुद्रग्रह बेल्ट के बाहरी हिस्से में सूर्य की परिक्रमा करता है। इसकी खोज 1852 में की गई थी और इसका नाम ग्रीक पौराणिक कथाओं की आत्मा की देवी के नाम पर रखा गया था।
खगोलविदों को रडार और अन्य अवलोकनों से पता चला है कि यह क्षुद्रग्रह काफी बड़ा है। इसकी साइज लगभग 144 मील (232 किलोमीटर) चौड़ा और 173 मील (280 किलोमीटर) लंबा है। यह लोहे, सोना, निकल और अन्य धातुओं से भरा हुआ है। यहां हीरे और चांदी के होने की भी उम्मीद की जा रही है।
एक साल पहले होना था मिशन
अंतरिक्ष यान की इस यात्रा के दौरान एक प्रायोगिक संचार प्रणाली भी उसके साथ है, जो गहरे अंतरिक्ष से पृथ्वी तक डेटा के प्रवाह को विस्तारित करने के प्रयास में रेडियो तरंगों के बजाय लेजर का उपयोग करती है। अंतरिक्ष यान को एक साल पहले रवाना किये जाने की उम्मीद थी, लेकिन कुछ प्रबंधकीय व तकनीकी कारणों से परीक्षण में देरी के कारण इसे रोक दिया गया था। इसलिए, मूल योजना के अनुसार 2026 में क्षुद्रग्रह पर पहुंचने के बजाय, अंतरिक्ष यान 2029 तक वहां पहुंचेगा।
