Donald Trump on India-Pak Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि अमेरिकी प्रशासन ने भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए सफलतापूर्वक ऐतिहासिक संघर्षविराम करवाया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने रियाद में सऊदी-अमेरिका निवेश फोरम को संबोधित करते हुए कहा कई दावे किए। ट्रंप ने कहा कि उन्हें युद्ध पसंद नहीं है और वह शांतिदूत बनना चाहते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने किया भारत-पाक पर ये दावा
मेरी सबसे बड़ी उम्मीद शांतिदूत बनना है...
सऊदी-अमेरिका निवेश फोरम में ट्रंप ने कहा, जैसा कि मैंने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा था, मेरी सबसे बड़ी उम्मीद शांतिदूत बनना और एकता लाना है। मुझे युद्ध पसंद नहीं है। वैसे, हमारे पास दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी सेना है। उन्होंने दावा किया, कुछ ही दिन पहले, मेरे प्रशासन ने भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ती हिंसा को रोकने के लिए ऐतिहासिक संघर्षविराम को सफलतापूर्वक करवाया।
ट्रंप ने की व्यापार की बात
ट्रंप खाड़ी क्षेत्र की अपनी चार दिवसीय यात्रा के पहले चरण में सऊदी अरब में हैं। उन्होंने कहा, और मैंने ऐसा करने के लिए काफी हद तक व्यापार का इस्तेमाल किया। और मैंने कहा कि साथियो, चलो। चलो एक सौदा करते हैं। चलो कुछ व्यापार करते हैं। ट्रंप के इस संबोधन के दौरान वहां मौजूद दर्शकों ने तालियां बजाईं। इस दौरान अरबपति एलन मस्क भी मौजूद थे। भारत और पाकिस्तान चार दिन तक सीमा पार से ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद 10 मई को संघर्ष समाप्त करने पर सहमत हुए थे।
भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर
बता दें कि पहलगाम हमले के बाद भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को दहला दिया था जिसके बाद उसकी गुहार पर दोनों देशों के बीच सीजफायर हुआ। भारत और पाकिस्तान ने चार दिनों तक सीमा पार ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद शनिवार को जमीन, हवा और समुद्र में किसी भी तरह के संघर्ष को तुरंत खत्म करने पर सहमति जताई थी। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने इसकी औपचारिक घोषणा की थी। खास बात ये थी कि ट्रंप ने पहले ही इस सीजफायर की जानकारी सोशल मीडिया पर दे दी थी, जिसे लेकर सवाल उठे थे कि क्या अमेरिका की इसमें बड़ी भूमिका है।
पहलगाम हमले से तनाव
22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था। पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने पर्यटकों से उनक धर्म पूछा और उन्हें मार डाला जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का यह स्पष्ट प्रयास था। जवाब में भारत ने हमले के जिम्मेदार आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इसके तहत भारत ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ढांचे को निशाना बनाया था।
