अधर में लटका ग्रीनलैंड पर ट्रंप को चुनौती देने वाली फ्रेडरिक्सन का सियासी भविष्य, किंगमेकर की भूमिका में आया यह शख्स

आधिकारिक परिणामों के अनुसार, प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन की मध्य-वामपंथी सोशल डेमोक्रेट पार्टी को 2022 के पिछले चुनाव की तुलना में नुकसान हुआ है। वही उनकी सरकार में शामिल अन्य सहयोगी दलों को भी विपरित परिणाम मिले है। संसद में न तो वामपंथी और न ही दक्षिणपंथी गुटों को बहुमत मिला है।

Denmark Election : डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन तीसरी बार पीएम बन पाएंगी या नहीं, इस पर सस्पेंस खड़ा हो गया है। दरअसल, चुनाव में उनकी पार्टी सेंट्रल-लेफ्ट सोशल डेमोक्रेट बहुमत से दूर है। इसे अब तक के चुनाव में 48 साल की फ्रेडरिक्सन का सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा है। इस चुनाव में महंगाई एवं अप्रवासन के मुद्दे पर दक्षिणपंथी एवं वामपंथी दोनों ही पार्टियों से फ्रेडेरिक्सन को कड़ी चुनौती मिली है। दरअसल, ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से टकराने वाली फ्रेडरिक्सन से उम्मीद थी कि लोग उनका समर्थन करेंगे और आसानी से बहुमत प्राप्त कर लेंगी।

Mette Frederiksen

मेटे फ्रेडेरिक्सन की पार्टी को बहुमत नहीं मिला है।

दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है ग्रीनलैंड

ग्रीनलैंड पर ट्रंप को धमकी देते हुए फ्रेडरिक्सन ने कहा था कि यदि ट्रंप इस पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं तो यह एक तरीके से उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) का एक तरीके से अंत होगा। ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। पिछले दिनों ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका की सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण होना जरूरी है। हालांकि, ग्रीनलैंड के मुद्दे पर ट्रंप को यूरोपीय देशों से भारी विरोध का सामना करना पड़ा।

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