विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र (UNGA81) के दौरान भारत-लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई देशों के संगठन (CELAC) के विदेश मंत्रियों की बैठक को संबोधित किया। उन्होंने भारत और इस क्षेत्र के देशों के बीच आर्थिक और विकास संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर
भारत की आर्थिक प्रगति और ग्लोबल साउथ का विकास
जयशंकर ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है। भारत की जीडीपी दोगुने से अधिक बढ़ी है और आर्थिक विकास मजबूत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत के पास बड़ी और तेजी से कुशल हो रही मानव संसाधन क्षमता, बड़ा बाजार, मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचा और बढ़ती तकनीकी क्षमताएं हैं। इन क्षमताओं के बल पर भारत ग्लोबल साउथ के अपने साझीदारों और वैश्विक विकास में सार्थक योगदान देने में पूरी तरह सक्षम है।
व्यापार और आर्थिक साझेदारी को नए आयाम
विदेश मंत्री ने CELAC देशों के प्रतिनिधियों की भारत में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में भागीदारी का भी स्वागत किया। इनमें रायसीना डायलॉग, एआई इम्पैक्ट समिट और BRICS जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। जयशंकर ने कहा कि भारत को अगले साल से अपने वार्षिक बिजनेस समिट को और व्यापक बनाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। इसमें दोनों पक्षों के आर्थिक संबंधों के साथ साझेदारी के दूसरे पहलुओं को भी एक ही मंच पर लाया जा सकता है।
दोनों पक्षों के बीच फायदेमंद हो आर्थिक साझेदारी
जयशंकर ने कहा कि भारत इस क्षेत्र के साथ मजबूत और संतुलित आर्थिक साझेदारी बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए चिली के साथ प्रस्तावित CEPA, पेरू के साथ FTA और मर्कोसुर (Mercosur) के साथ PTA के विस्तार पर तेजी से काम चल रहा है। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का मकसद ऐसे आर्थिक ढांचे को तैयार करना है, जिनसे दोनों पक्षों को लाभ मिले। उन्होंने कहा कि भारत तेज प्रगति चाहता है, लेकिन इसके साथ दोनों पक्षों की प्राथमिकताओं और संवेदनशीलताओं का भी ध्यान रखा जाएगा। विदेश मंत्री ने भारत के विकास अनुभव को अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की एक महत्वपूर्ण ताकत बताया।
