Israeli Camp In Iraq: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है। खुफिया और सैन्य अधिकारियों के हवाले से खबर सामने आई है कि युद्ध की शुरुआत में ही इजरायली बलों ने इराक के पश्चिमी रेगिस्तान में एक गुप्त ठिकाना (सैन्य कैंप) बना लिया था। इस सीक्रेट बेस की बात तब सामने आई जब इराक के सुरक्षा बलों ने इस इलाके में संदिग्ध गतिविधियों की जांच शुरू की और उन पर अचानक हवाई हमला कर दिया गया।
इजरायल ने इराक में सीक्रेट कैंप बना रखा था। AI IMAGE
इराकी सुरक्षा अधिकारियों ने किया खुलासा
इस गोपनीय ठिकाने की मौजूदगी की पुष्टि दो इराकी सुरक्षा एवं खुफिया अधिकारियों और एक वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर की है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारी ने इसे 'परमानेंट बेस' कहने के बजाय ईरान में ऑपरेशन्स को सपोर्ट करने वाला एक 'अस्थायी कैंप या स्टेजिंग एरिया' बताया है।
भेड़ चराने वाले ने खोला राज
रिपोर्ट के अनुसार, यह गुप्त ठिकाना इराक की राजधानी बगदाद से लगभग 250 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में, करबला और नजफ शहरों के पास स्थित 'नुखैब रेगिस्तान' (Nukhaib Desert) में बनाया गया था।
मार्च की शुरुआत में एक स्थानीय भेड़ चराने वाले (चरवाहे) ने इस बेहद सुनसान और बंजर इलाके में कुछ अजीब और संदिग्ध सैन्य गतिविधियां देखीं। उसने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय इराकी अधिकारियों को दी।
जानकारी मिलने पर जब 4 मार्च को इराकी सेना की एक टुकड़ी इस स्थान की जांच करने के लिए आगे बढ़ी, तो ठिकाने से करीब 25 किलोमीटर पहले ही उन पर अचानक आसमान से जोरदार हवाई हमला हो गया। इस हमले में इराक का एक सैनिक मारा गया और दो अन्य घायल हो गए। हमले के बाद इराकी बल पीछे हट गए।
इजरायल ने इराक में बनाया था सीक्रेट सैन्य कैंप। AP
एयरड्रॉप के जरिए पहुंचे थे इजरायली कमांडो!
इराकी खुफिया अधिकारियों का मानना है कि इजरायली विशेष बल (Special Forces) एयरड्रॉप ऑपरेशन (पैराशूट या हेलीकॉप्टर के जरिए) के माध्यम से गुप्त रूप से इस रेगिस्तानी इलाके में उतरे थे।
इस कैंप को स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य ईरान समर्थित कुछ इराकी मिलिशिया (गुटों) द्वारा किए जाने वाले रॉकेट हमलों और ड्रोन गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखना था। इसके साथ ही, यह इजरायली वायुसेना के लिए एक लॉजिस्टिक हब के रूप में भी काम कर रहा था, ताकि अगर ईरान के ऊपर किसी इजरायली पायलट का विमान क्रैश या शॉट-डाउन हो, तो उसे तुरंत वहां से रेस्क्यू (बचाया) किया जा सके।
इजरायल ने क्यों बनाया बेस?
इराकी खुफिया अधिकारी ने बताया कि इजरायली सेना ने इलाके में तंबू लगाए थे और उनका उद्देश्य कुछ इराकी मिलिशिया द्वारा किए जा रहे रॉकेट हमलों और ड्रोन गतिविधियों पर नजर रखना था। उन्होंने कहा कि इराकी अधिकारियों का मानना है कि सेना हवाई मार्ग से सैनिकों को उतारने के अभियान के जरिए पहुंची थी, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि कब। उन्होंने सैन्य उपस्थिति को 'बेस' बताए जाने पर भी आपत्ति जताई।
इराक सरकार के लिए बेहद असहज स्थिति
अपनी ही सरजमीं पर बिना इजाजत इजरायली सेना के इस गुप्त ऑपरेशन ने इराकी अधिकारियों को बेहद असहज और शर्मनाक स्थिति में डाल दिया है। इराक इस पूरे क्षेत्रीय युद्ध में खुद को तटस्थ रखने और अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी हमले के लिए न होने देने की अपील करता रहा है।
इस विवाद को शांत करने और किसी भी दीर्घकालिक सैन्य उपस्थिति से इनकार करने के लिए, हाल ही में इराकी सेना के शीर्ष कमांडरों ने पत्रकारों को उस रेगिस्तानी इलाके का दौरा भी कराया। इराकी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल तहसीन अल-खफाजी ने कहा, "हमारा मानना है कि यह एक बहुत छोटा बल था जो वहां आया था और 48 घंटे से अधिक नहीं रुका।" जब सेना हमले के अगले दिन वापस वहां पहुंची, तो वहां कोई टेंट या बल मौजूद नहीं था।
सैटेलाइट तस्वीरों ने की पुष्टि
भले ही अधिकारी इसे बेहद छोटा और अस्थायी बता रहे हों, लेकिन एयरबस डीएस (Airbus DS) द्वारा ली गई सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से साफ हुआ है कि इस सूखे हुए झील के तल वाले इलाके में इंसानों द्वारा बनाई गई एक सीधी ट्रैक (रास्ता) साफ दिखाई दे रही है, जो करीब 1.5 किलोमीटर (1 मील) लंबी है। इस खुलासे पर फिलहाल इजरायली सैन्य प्रतिनिधियों ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
