Israel News: इजराइल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मोड़ आ गया है। इजराइल में सरकार बनाने की दौड़ में यशार पार्टी के अध्यक्ष एवं IDF के पूर्व चीफ गादी आइजेनकोट सबसे आगे हैं। उन्हें यहूदी नेतृत्ववाले विपक्षी ब्लॉक का समर्थन तो प्राप्त है ही। अरब पार्टियों-राम पार्टी एवं ज्वाइंट लिस्ट ने भी उन्हें समर्थन दिया है। इस तरह आइजेनकोट के पास 67 सांसदों का समर्थन है। इजराइल में सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों की जरूरत होती है। 67 सांसदों का समर्थन मिलने के बाद आइजेनकोट ने कहा है कि सरकार बनाने के लिए वह 'प्रतिबद्ध' हैं और उन्हें लंबा रास्ता तय करना है।
इजराइल में गादी आइजेनकोट की सरकार बनने के आसार।
चुनाव में किसी भी खेमे को बहुमत नहीं मिला
दरअसल, अक्टूबर के आखिर में हुए चुनाव में किसी भी खेमे को बहुमत नहीं मिला। 120 सदस्यीय नेसेट में नेतन्याहू के गुट को 53 सीटें मिलीं, विपक्षी दलों को 48 और अरब-नेतृत्व वाले दलों को 19। बहुमत के लिए 61 सीटें चाहिए, और नेतन्याहू का गुट इस आंकड़े से काफी दूर रह गया। यहीं से उनके छठी बार प्रधानमंत्री बनने की उम्मीदें कमजोर पड़ने लगीं। नफ्ताली बेनेट, यायर गोलान और अविगदोर लिबरमन की पार्टियों ने तय किया है कि वे राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग को आइजेनकोट का नाम सरकार बनाने के लिए सुझाएंगे।
बेनेट-लिबरमन ने छोड़ा नेतन्याहू का साथ
बेनेट और लिबरमन कभी नेतन्याहू के साथ राजनीति कर चुके हैं। लिबरमन ने साफ कहा है कि वे नेतन्याहू के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। यानी नेतन्याहू को दक्षिणपंथी खेमे के भीतर से भी वह समर्थन नहीं मिला, जिसकी उन्हें जरूरत थी। असली गणित अरब दलों के हाथ में है। रिकॉर्ड 19 सीटें जीतने वाले अरब दल आइजेनकोट के खेमे का समर्थन करने की ओर बढ़ रहे हैं। इनमें रा'म के पास 8 और जॉइंट लिस्ट के पास 11 सीटें हैं। विपक्ष की 48 सीटों में अरब दलों की 19 सीटें जुड़ें तो आइजेनकोट के पास कुल 67 सिफारिशें हो जाती हैं। ऐसे में राष्ट्रपति हर्जोग सरकार बनाने का मौका नेतन्याहू के बजाय आइजेनकोट को दे सकते हैं।
बाहर से समर्थन दे सकते हैं अरब दल
लेकिन राह आसान नहीं है। आइजेनकोट और उनके सहयोगी पहले कह चुके हैं कि वे अरब दलों के साथ गठबंधन सरकार नहीं बनाएंगे। उन्होंने शर्तें भी रखी हैं- इजराइल को यहूदी और लोकतांत्रिक राष्ट्र मानना और हमास को आतंकी संगठन मानना। इसलिए आशंका है कि अरब दल सरकार में शामिल होने के बजाय बाहर से समर्थन दें। इजराइल के इतिहास में सिर्फ एक बार, 2021 में, कोई अरब पार्टी सरकार में शामिल हुई थी, और वह सरकार करीब 18 महीने ही चली।
...तो इजराइल में फिर होगा चुनाव
नेतन्याहू इसी मुद्दे को हथियार बना रहे हैं। उनकी पार्टी लिकुड ने ऐसे सहयोग को 'इजराइल के लिए खतरनाक' बताया है। आइजेनकोट के घर के बाहर इस संभावित गठजोड़ के ख़िलाफ प्रदर्शन भी हुआ। दूसरी तरफ आइजेनकोट कह चुके हैं कि वे नेतन्याहू के साथ सरकार नहीं बनाएंगे। आगे की प्रक्रिया भी तय है। राष्ट्रपति हर्जोग नतीजे प्रमाणित होने के बाद सलाह-मशविरा शुरू करेंगे। जिसे जिम्मेदारी मिलेगी, उसके पास सरकार बनाने के लिए 28 दिन होंगे, जिन्हें 14 दिन और बढ़ाया जा सकता है। अगर कोई भी बहुमत नहीं जुटा पाया तो इजराइल को फिर चुनाव में जाना पड़ सकता है। 2019 में ऐसे ही गतिरोध के बाद साढ़े तीन साल में पांच चुनाव हुए थे।
कुल मिलाकर, नेतन्याहू का दौर खत्म होने के संकेत मजबूत हुए हैं, पर फैसला अभी बाकी है। अब सवाल यह है कि आइजेनकोट अपने वादों और अरब दलों की मांगों के बीच संतुलन बना पाएंगे या नहीं। अगले कुछ हफ्लेत इजराइल ही नहीं, पूरे पश्चिम एशिया की राजनीति की दिशा तय करेंगे।
