US Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा दक्षिणी ईरान में लगातार तीसरे दौर की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी कदम उठाते हुए पांच खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। साथ ही, तेहरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज को अगले आदेश तक बंद करने की घोषणा की। भले ही, तेहरान होर्मुज को बंद करने का दावा कर रहा है, लेकिन अमेरिका ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया और बताया कि सभी जहाजों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण यह रास्ता खुला हुआ है।
होर्मुज में फिर बढ़ा तनाव (फोटो साभार: AI)
ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि यह स्थिति आखिर कैसी बनी? दोनों देशों के बीच संघर्ष किस दिशा में बढ़ रहा है और इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ने वाला है।
ईरान ने खाड़ी देशों पर क्यों किया हमला
ईरान के मुताबिक, अमेरिका ने पिछले हफ्ते दक्षिणी ईरान में मिसाइल, ड्रोन ठिकानों और अन्य सैन्य प्रतिष्ठानों पर तीसरे दौर की बमबारी की। ऐसे में तेहरान कहां चुप बैठने वाला था। उसने भी पलटवार करते हुए बहरीन, कुवैत, कतर, ओमान और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल और ड्रोन की मदद से हमले किए।
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका ने पिछले महीने हुए समझौते (MoU) का उल्लंघन किया है और अब एकतरफा समझौतों का दौर खत्म हो चुका है।
इतना क्यों बिगड़ा मामला?
पिछले महीने अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता हुआ था, लेकिन उसमें कई अहम मुद्दों पर स्पष्ट सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद हालात उस वक्त बिगड़े जब ईरान की आईआरजीसी ने होर्मुज से गुजरे रहे तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हमला किया। जवाब में अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर पूरी ताकत से हमले किए, जिसके बाद दोनों देशों के रिश्ते निचले स्तर पर पहुंच गए और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत से भी इनकार कर दिया और कहा कि सीजफायर पूरी तरह से खत्म हो गया।
होर्मुज में फिर बढ़ा तनाव (फोटो साभार: AI)
US ने बरपाया कहर
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, हालिया सैन्य अभियान में लगभग 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन बेस, नौसैनिक सुविधाएं, हथियार भंडार, संचार नेटवर्क और तटीय निगरानी केंद्र शामिल हैं।
अमेरिका ने दावा किया कि तीन दिनों में 300 से अधिक सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की गई ताकि ईरान की समुद्री मार्गों पर हमला करने की क्षमता को प्रभावित किया जा सके। वहीं, ईरानी सरकारी एजेंसी ने दावा किया कि लोरेस्तान, खोन्दाब और बुशेहर प्रांत के कई शहरों को अमेरिका ने निशाना बनाया है।
क्या सच में बंद हो गया होर्मुज?
होर्मुज को लेकर ईरान और अमेरिका के अपने-अपने दावे हैं। पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ने के बाद ईरान ने जहां होर्मुज को बंद करने का ऐलान कर दिया। वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि होर्मुज में निर्बाध समुद्री यातायात जारी है और यह ईरान के नियंत्रण में नहीं है।
ईरान ने होर्मुज को अगले आदेश तक बंद करने का ऐलान किया और कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र में अवैध समुद्री मार्ग बनाने की कोशिश कर रहा है। दरअसल, होर्मुज दुनिया का सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्ग माना जाता है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की लगभग 20 फीसदी हिस्सा यहीं से गुजरता है।
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क्या पश्चिम एशिया में बढ़ेगा तनाव?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर अमेरिका और ईरान के बीच जल्द ही हमले नहीं रुके तो पश्चिम एशिया में संघर्ष और व्यापक हो सकता है। इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार, ऊर्जा कीमतों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ने की आशंका है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बीते दिनों एक ऐसा बयान दिया जिसके बाद ऐसी संभावना जताई जा रही है कि दोनों देशों के बीच एक बार फिर बातचीत शुरू हो सकती है। दरअसल, ट्रंप ने कहा कि ईरान ने बातचीत का अनुरोध किया है और हम इसके लिए राजी हैं, लेकिन सीजफायर पूरी तरह से खत्म हो चुका है।
