Iran Supertanker: ईरान की नेशनल ईरानियन टैंकर कंपनी का एक VLCC सुपरटैंकर अमेरिकी नाकेबंदी को चकमा देकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र तक पहुंच गया है। अल जजीरा के मुताबिक, 'ह्यूज' नाम का यह जहाज करीब 1.9 मिलियन बैरल कच्चा तेल लेकर जा रहा है, जिसकी कीमत लगभग 220 मिलियन डॉलर बताई गई है। यह टैंकर आखिरी बार श्रीलंका के पास देखा गया था और फिलहाल इंडोनेशिया के लोम्बोक स्ट्रेट से होते हुए रियाउ द्वीपसमूह की ओर बढ़ रहा है।
ईरानी सुपरटैंकर पहुंचा प्रशांत क्षेत्र (AI Image)
AIS बंद रखने से ट्रैकिंग हुई मुश्किल
बताया गया है कि यह जहाज मार्च से अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) बंद रखे हुए था, जिससे उसकी ट्रैकिंग मुश्किल हो गई। ईरान का दावा है कि उसके दर्जनों जहाज इस नाकेबंदी को पार कर चुके हैं, जबकि अमेरिका का कहना है कि उसने कई जहाजों को वापस लौटने पर मजबूर किया है और इस कार्रवाई से ईरान को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
बता दें कि ईरान के साथ बातचीत नाकाम होने के साथ ही अमेरिका ने होर्मुज की नाकेबंदी कर दी थी। इसके तहत ईरान के जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ लागू की गई नौसैनिक घेराबंदी (Naval Blockade) को एक बड़ी कूटनीतिक और सैन्य जीत बताते हुए इसे 'जीनियस' और '100% फुलप्रूफ' करार दे चुके हैं। राष्ट्रपति ने अमेरिकी नौसेना की बेमिसाल ताकत की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि इस सख्त घेराबंदी ने ईरान को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है और अब कोई भी देश अमेरिका के साथ 'खेल' खेलने की जुर्रत नहीं कर पाएगा।
ईरान को न्यूक्लियर प्रोग्राम छोड़ना होगा- ट्रंप
इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर अमेरिका की चिंताओं को दूर करने वाले डील पर जब तक सहमत नहीं होता तब तक होर्मुज के बाहर उसकी नौसैनिक घेराबंदी जारी रहेगी। ईरान चाहता है कि अमेरिका पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर से अपनी घेराबंदी हटाए। इस घेराबंदी की वजह से ईरान के जहाजों का आवागमन नहीं हो पा रहा है।
रिपोर्टों में कहा गया है कि इससे ईरान को भारी दिक्कत होने लगी है। वहीं, Axios की रिपोर्ट में इस मामले की जानकारी रखने वाले तीन सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि यूएस के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बातचीत पर बने गतिरोध को तोड़ने के लिए ईरान पर 'छोटे लेकिन ताकतवर' हमले की एक योजना तैयार की है। CENTCOM अपने हमलों में ईरान की बुनियादी संरचनाओं को निशाना बना सकता है। इन हमलों का मकसद बातचीत शुरू करने के लिए ईरान पर दबाव बनाना है। ट्रंप का कहना है कि 'ब्लॉकेड, बॉम्बिंग से ज्यादा कारगर है और वह काइनेटिक एक्शन की मंजूरी दे सकते हैं।'
