इमरान खान करेंगे जिहाद ! क्या बड़े राजनीतिक संकट की ओर PAK

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  • Updated Oct 28, 2022, 11:38 AM IST

Imran Khan Hakiki Azadi March: अप्रैल 2022 में विश्वास मत खोने के बाद, प्रधानमंत्री पद से हटाए गए इमरान खान पर मौजूदा शहबाज शरीफ सरकार लगातार शिकंजा कस रही है। और इसी कड़ी में बीते 21 अक्टूबर को इमरान खान को पाकिस्तान निर्वाचन आयोग से बड़ा झटका लगा। उसने तोशखान केस में उन पर 5 साल के लिए किसी सार्वजिनक पद स्वीकार करने से रोक लगा दी थी।

KEY HIGHLIGHTS
  • हकीकी आजादी मार्च लाहौर से शुरू होकर इस्लामाबाद तक निकालने की योजना है।
  • बीते मई में भी इमरान खान निकाल चुके हैं आजादी मार्च, लेकिन हिंसा के बाद वापस ले लिया था।
  • उप चुनाव में इमरान खान की पार्टी PTI को भारी जीत मिली है।

Imran Khan Hakiki Azadi March: अपने राजनीतिक करियर के सबसे बड़े संकट का सामना कर रहे पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान एक बार फिर उस हथियार को इस्तेमाल करने जा रहे हैं, जिसे उन्होंने साल 2014 में नवाज शरीफ सरकार और फिर बीते मई में प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने के बाद इस्तेमाल किया था। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के प्रमुख इमरान खान (Imran Khan ) ने आज (28 अक्टूबर) से 'हकीकी आजादी'(Hakiki Azadi March) मार्च शुरू कर रहे हैं। जो कि शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ हल्ला बोल होगा। हकीकी आजादी मार्च के जरिए इमरान की कोशिश शहबाज शरीफ सरकार को दबाव में लाना है, जिससे नेशनल असेंबली भंगकर मध्यावधि चुनाव कराने के लिए विवश किया जा सके। उन्होंने अपने हकीकी आजादी मार्च की तुलना जिहाद से करते हुए कहा है कि यह जिहाद तय करेगा कि देश किस ओर जाएगा।

IMRAN KHAN HAKIKI AZADI MARCH

शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ इमरान खान का हल्ला बोल

क्यों कर रहे हैं हकीकी आजादी मार्च

असल में अप्रैल 2022 में विश्वास मत खोने के बाद, प्रधानमंत्री पद से हटाए गए इमरान खान, पर मौजूदा शहबाज शरीफ सरकार लगातार शिकंजा कस रही है। और इसी कड़ी में बीते 21 अक्टूबर को इमरान खान को पाकिस्तान निर्वाचन आयोग से बड़ा झटका लगा। उसने तोशखान केस में उन पर 5 साल के लिए किसी सार्वजिनक पद स्वीकार करने से रोक लगा दी थी। साथ ही उनकी नेशनल असेंबली की सदस्यता भी चली गई। निर्वाचन आयोग ने तोशाखाना मामले पर कार्रवाई करते हुए यह फैसला सुनाया था। इमरान खान पर, प्रधानमंत्री रहते विदेशी नेताओं से प्राप्त उपहारों की बिक्री से हुई आय को छिपाने का आरोप था।

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