वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। इसी क्रम में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बीते दिन सऊदी अरब का दौरा किया। विदेश मंत्रालय ने इसे 'मददगार' करार दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर यह दौरा किया गया। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में यह भारत की सक्रिय कूटनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि डोभाल ने सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री, विदेश मंत्री और अपने समकक्ष के साथ उच्चस्तरीय बैठकें कीं। इन बैठकों में क्षेत्रीय हालात पर विचार-विमर्श हुआ और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल
चार प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित थी डोभाल की वार्ता
रणधीर जायसवाल ने बताया कि अजीत डोभाल की सऊदी अरब के नेताओं से की गई बातचीत चार प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित थी। ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता, वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा, होर्मुज जलडमरूमध्य और पर्शियन गल्फ से जुड़ी चुनौतियां, तथा खुफिया सहयोग और समन्वय को बढ़ाना। इसके साथ ही आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। उन्होंने यह भी कहा कि खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं और भारत की ऊर्जा जरूरतें भी इस क्षेत्र पर काफी हद तक निर्भर हैं। ऐसे में इजराइल, फिलिस्तीन और ईरान सहित सभी पक्षों के साथ संपर्क बनाए रखना भारत के “रणनीतिक और आर्थिक हितों” के लिए बेहद जरूरी है।
भारत अपना रहा संतुलित रुख
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी इस संघर्ष का असर लेबनान, सीरिया और यमन पर भी पड़ रहा है, ऐसे में भारत ने संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाया है। भले ही इस संघर्ष ने समुद्री परिवहन मार्गों को बाधित किया है और मानवीय चिंताएं बढ़ा दी हैं, फिर भी नई दिल्ली सभी युद्धरत पक्षों से संयम बरतने, संघर्ष क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा और संवाद आधारित समाधान की वकालत करती रही है ताकि आगे तनाव न बढ़े।
