Palestinian : फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को एक राष्ट्र के रूप में फिलिस्तीन को मान्यता दे दी। खास बात यह है कि न्यूयॉर्क में शुरू हो रहे संयुक्त राष्ट्र महाधिवेशन से पहले फिलिस्तीन को राष्ट्र के रूप में मान्यता देने वाला फ्रांस यूरोप का एक महत्वपूर्ण देश है। कनाडा और ब्रिटेन फिलिस्तीन को देश की मान्यता पहले ही दे चुके हैं। आने वाले दिनों में कई देश को फिलिस्तीन को मान्यता दे सकते हैं। यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को एक झटका है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों। तस्वीर-AP
नये स्तर पर समर्थन को बढ़ावा देना है मकसद
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को कहा कि फ्रांस आधिकारिक तौर पर फलस्तीन राष्ट्र को मान्यता दे रहा है। यह कदम फ्रांस और सऊदी अरब की अध्यक्षता में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के दौरान उठाया गया, जिसका उद्देश्य इजरायल-फलस्तीन विवाद के द्वि-राष्ट्र समाधान के लिए नये स्तर पर समर्थन को बढ़ावा देना है।
जर्मनी, इटली और अमेरिका ने इसमें भाग नहीं लिया
यूएन में बोलते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि 'फिलिस्तीन में शांति कायम करने का समय आ गया है। गाजा में जारी युद्ध को कोई भी बात न्यायसंगत नहीं ठहरा सकती।' फ्रांस और सऊदी अरब संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक दिवसीय शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहे हैं, जो संघर्ष के दो-राज्य समाधान की योजनाओं पर केंद्रित है। जी7 देशों जर्मनी, इटली और अमेरिका ने इसमें भाग नहीं लिया।
ये देश भी दे सकते हैं मान्यता
माक्रों ने पुष्टि की कि बेल्जियम, लक्ज़मबर्ग, माल्टा, अंडोरा और सैन मरीनो भी फिलिस्तीन राज्य को मान्यता देंगे, इसके बाद कि रविवार को ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और पुर्तगाल ने मान्यता की घोषणा की थी। फिलिस्तीन को मान्यता देना अमेरिका और इजरायल दोनों के लिए झटका माना जा रहा है, क्योंकि दोनों देश इसका विरोध करते आ रहे हैं। दुनिया के ज्यादातर देश चाहते हैं कि फिलिस्तीन समस्या का समाधान द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को मान्यता देकर हो। गाजा सिटी में इजरायल के हमले जारी है और वहां अकाल जैसी स्थितियां हैं।
