हिंसा-उपद्रव को दोहराने नहीं देगी मैक्रौं सरकार, सड़कों पर उतारे 70 हजार जवान, मशहूर म्यूजियम बंद किए

शायद ही किसी ने सोचा होगा कि फ्रांस को इस तरह की आगजनी, हिंसा और उपद्रव का सामना करना होगा। दरअसल, शिक्षा, स्वास्थ्य में सुधार की मांग को लेकर और बढ़ती महंगाई के खिलाफ छात्र और युवा सड़कों पर उतरे। फिर धीरे-धीरे इस प्रदर्शन का दायरा बड़ा हुआ और प्रदर्शन में शरारती तत्व शामिल होते चले गए।

France Protest: पिछले सप्ताह खासतौर से 17 अक्टूबर को फ्रांस के शहरों में जो कुछ हुआ, उसे दुनिया ने देखा कि किस तरह से प्रदर्शनकारी दंगाई में बदल गए। भीड़ उपद्रव करने लगी। सड़कों पर आगजनी, पथराव और हिंसा का दौर चला। वाहनों-इमारतों में आग लगा दी गई। जिस टाउन हाल पर फ्रांस गर्व करता था, उसे जला दिया गया। दुकानें लूट ली गईं। यह सब हुआ लोकतंत्र के सबसे बड़े झंडाबरदार देशो में शुमार फ्रांस में। शायद ही किसी ने सोचा होगा कि फ्रांस को इस तरह की आगजनी, हिंसा और उपद्रव का सामना करना होगा। दरअसल, शिक्षा, स्वास्थ्य में सुधार की मांग को लेकर और बढ़ती महंगाई के खिलाफ छात्र और युवा सड़कों पर उतरे। फिर धीरे-धीरे इस प्रदर्शन का दायरा बड़ा हुआ और प्रदर्शन में शरारती तत्व शामिल होते चले गए। इसके बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि वह इस आंदोलन के पैमाने का अंदाज़ा ही नहीं लगा पाई।

france protest

फ्रांस में फिर प्रदर्शन होने वाले हैं।

हाई अलर्ट पर है मैक्रों सरकार

लेकिन अब मैक्रों सरकार हाई अलर्ट पर है। उपद्रव और हिंसा की इन घटनाओं के बाद फ्रांस की सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। 24 अक्टूबर को होने वाले प्रदर्शन से पहले उसने एहतियाती कदम उठाए गए हैं। गृह मंत्री लोरां नुन्येज़ ने साफ कहा कि हम किसी चीज को अनदेखा नहीं करेंगे।' उन्होंने तोड़फोड़ करने वालों और लुटेरों के खिलाफ 'कोई नरमी नहीं' बरतने की बात कही। न्याय मंत्री जेराल्ड दारमनां के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। 17 अक्टूबर के दंगों में 232 लोगों को जेल भेजा जा चुका है और 1,100 से ज्यादा लोग अदालत में पेश हो चुके हैं। इनमें करीब 260 मामलों में संगठित गिरोह बनाकर अपराध करने के आरोप हैं। यानी फास्ट-ट्रैक अदालतें चल रही हैं।

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