पीएम मोदी के कार्यों और नेतृत्व क्षमता को लेकर विश्व के कई बड़े नेता उनके मुरीद हो चुके हैं। इस लिस्ट में अब ब्रिटेन के सांसद, अर्थशास्त्री, बैंकर और शिक्षाविद निकोलस स्टर्न का नाम जुड़ गया है। एक कार्यक्रम के दौरान निकोलस स्टर्न ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की है।
पीएम मोदी के साथ ब्रिटिश सांसद निकोलस स्टर्न
पीएम मोदी की तारीफ में जमकर पढ़े कसीदे
यूके में हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य निकोलस स्टर्न ने विश्व बैंक के कार्यक्रम 'मेकिंग इट पर्सनल: हाउ बिहेवियरल चेंज कैन टैकल क्लाइमेट चेंज' के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत की LiFE मिशन के लिए पीएम मोदी की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा- "पीएम मोदी विकास और विकास की एक पूरी नई कहानी लेकर आए हैं। मैंने नवंबर 2021 में ग्लासगो में COP 26 में उनके भाषण को ध्यान से सुना और उन्होंने LiFE सहित जो मापदंड निर्धारित किया, वह स्थायी लचीलापन और समावेशी विकास जैसा दिखता है।"
क्या कहा स्टर्न ने
स्टर्न ने कहा कि पीएम मोदी का यह मॉडल आपको ऐसा शहर देता है जहां आप घूम सकते हैं और सांस ले सकते हैं। वहां आपको एक उपयोगी पारिस्थितिकी तंत्र देता है और ऊर्जा संसाधनों का अधिक कुशलता से उपयोग करता है। उन्होंने कहा- "यह आपको ऐसे शहर देता है जहां आप घूम सकते हैं और सांस ले सकते हैं। यह आपको ऐसे पारिस्थितिक तंत्र प्रदान करता है जो मजबूत होते हैं। यह ऊर्जा और अन्य सभी संसाधनों का अधिक कुशलता से उपयोग करता है। मेरा मतलब है, अगर आप वायु प्रदूषण से लोगों को मारना बंद कर दें, तो यह आउटपुट के लिए बहुत अच्छा है। लेकिन वास्तव में, सीधे तौर पर लोगों को वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों को रोकना बहुत महत्वपूर्ण है। यह विकास का मतलब है। इसलिए अतीत के गंदे, विनाशकारी मॉडल से टूटने और कुछ अधिक आकर्षक बनाने के नए तरीके की तस्वीर होने के कारण, मुझे लगता है कि यह सभी के लिए एक साथ काम करने के लिए बिल्कुल मौलिक है।"
पीएम मोदी क्या बोले
वहीं पीएम मोदी ने इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जब लोग इस बात को लेकर सजग हो जाते हैं कि रोजाना के जीवन में की गई उनकी छोटी-छोटी कोशिशें भी बेहद कारगर साबित हो सकती हैं, तो पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में लोगों की भागीदारी के साथ-साथ सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कोई विचार तब जन आंदोलन बन जाता है, जब वह “चर्चा की मेज़ से रात्रि भोज की मेज़’ तक पहुंच जाता है।
