Jaishankar-Wang Yi Meeting: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी से स्पष्ट तौर पर कहा कि दोनों देशों के बीच सामान्य राजनयिक संबंधों की बहाली के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिरता सुनिश्चित करना एक अनिवार्य शर्त। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि द्विपक्षीय संबंध आपसी सम्मान, आपसी हित और संवेदनशीलता पर आधारित होने चाहिए। विदेश मंत्री जयशंकर ने बातचीत के दौरान अपने चीनी समकक्ष के सामने महत्वपूर्ण आर्थिक चिंताएं भी उठाईं, जिसमें बाजार पहुंच की बाधाएं, बढ़ता व्यापार घाटा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की अनिश्चितता शामिल है। दोनों देशों के विदेश मंत्री आसियान (ASEAN) के तत्वावधान में आयोजित प्रमुख मंत्रिस्तरीय बैठकों में भाग लेने के लिए फिलीपींस की राजधानी मनीला में एकत्र हुए थे।
एस जयशंकर की चीन को दो टूक
जयशंकर के बयान की मुख्य बातें
द्विपक्षीय संबंधों का आधार: प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा, हमारा मानना है कि एक स्थिर और सहयोगात्मक संबंध आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के आधार पर ही सबसे बेहतर तरीके से विकसित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा संबंध एक बहु-ध्रुवीय एशिया और बहु-ध्रुवीय दुनिया में मूल्यवान योगदान दे सकता है।
सीमा पर शांति अनिवार्य शर्त: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति बनाए रखने की आवश्यकता को दोहराते हुए उन्होंने कहा, सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सामान्य संबंधों के लिए पहली शर्त है। अक्टूबर 2024 से, दोनों पक्ष इस महत्वपूर्ण उद्देश्य को सुनिश्चित करने में लगे हुए हैं"। उन्होंने कहा कि इस दिशा में संबंधित तंत्रों को पूरा समर्थन और प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।
मतभेदों को विवाद न बनने दें: राजनयिक सूझबूझ का आह्वान करते हुए जयशंकर ने सचेत किया कि अलग-अलग विचारों को सक्रिय टकराव में बदलने से रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा, दो बड़े, महत्वपूर्ण और पड़ोसी देश होने के नाते भारत और चीन के अपने विशेष हित होना स्वाभाविक है। इसीलिए हमारे नेताओं ने सहमति व्यक्त की थी कि मतभेदों को विवाद नहीं बनना चाहिए। इन्हें ठीक से प्रबंधित करना कूटनीति की जिम्मेदारी है।
आर्थिक चिंताओं पर जोर: आर्थिक मोर्चे पर भारत की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, उचित बाजार पहुंच) और व्यापार संतुलन इस मामले में शीर्ष पर हैं। इसके अलावा सप्लाई चेन की विश्वसनीयता को लेकर भी चिंताएं हैं। आधिकारिक और लोगों के बीच आपसी संपर्क को बढ़ावा देना भी हमारे ध्यान का हकदार है।
पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध का समाधान
चार साल पहले पूर्वी लद्दाख में शुरू हुए गंभीर सैन्य गतिरोध और तनाव के बाद, हाल के समय में दोनों एशियाई देशों के संबंधों में प्रगतिशील सुधार देखा गया है। सैन्य और राजनयिक स्तर की वार्ताओं के बाद दोनों देश एलएसी (LAC) के कई विवादित क्षेत्रों से अपनी अग्रिम चौकियों को पीछे हटाने में सफल रहे हैं।
अक्टूबर 2024 में दोनों पक्षों ने डेपसांग और डेमचोक पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक महत्वपूर्ण सैन्य वापसी (सैनिकों को पीछे हटाने के) समझौते को सफलतापूर्वक लागू किया, जिससे पूर्वी लद्दाख में अंतिम शेष गतिरोध वाले स्थानों का समाधान हो गया। इस बड़ी कामयाबी के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कजान (रूस) में एक द्विपक्षीय बैठक की थी, जिसमें दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास को दोबारा बहाल करने का खाका तैयार किया गया था।
