Ayatollah Ali Khamenei: खामेनेई शासन को खत्म करने का उद्देश्य लेकर अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य कार्रवाई (ऑपरेशन एपिक फ्यूरी) की शुरुआत की। अमेरिका और इजरायल के इस डबल अटैक ने ईरान को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया। हमले में 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनई की मौत हो गई। इस घटना ने दुनिया को झकझोर कर रख दिया। दुनियाभर में मौजूद शिया समुदाय से जुड़े लोगों ने घटना पर शोक प्रकट किया।
अय्यातुल्लाह खामेनेई का अब तक अंतिम संस्कार नहीं किया गया है। AI IMAGE
इस घटना को 50 दिनों से ज्यादा का वक्त हो चुका है, लेकिन अब तक उनके सुपुर्दे खाक को लेकर फैसला नहीं लिया जा सका है। ईरान के इस फैसले से दुनिया हैरान है। सवाल है कि आखिर ईरान ने ऐसा क्यों किया है?
इसका जवाब न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट से सामने निकलकर आई है। दरअसल, ईरानी अधिकारी इसके लिए सुरक्षा कारणों और लॉजिस्टिक चुनौतियों का हवाला दे रहे हैं। ईरानी अधिकारियों को डर है कि देश में अगर कोई बड़े सार्वजनिक आयोजन होते हैं तो इजरायल उस क्षेत्र को टारगेट कर सकता है।
अय्यातुल्लाह खामेनेई की मौत पर शोक प्रकट करते ईरान के लोग। AP
क्या डरा हुआ है ईरान का शासन?
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के बेहनम तालेब्लू ने जानकारी दी है कि मौजूद ईरान की सरकार खामेनेई की शोक सभा को आयोजन करने से हिचकिचा रही है बेहनम तालेब्लू ने कहा, "इसे इस तरह से भी कह सकते हैं कि मौजूदा ईरानी शासन इतना डरा हुआ और इतना कमजोर है कि जोखिम नहीं उठा सकता है।"
बात दें कि साल 1989 में जब आयतुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी का निधन हुआ था, तब उनके लिए बड़ा स्टेट फ्यूनरल का आयोजन किया गया था। उस समय तेहरान में लाखों लोग जुटे थे।
नए सुप्रीम लीडर को लेकर उठ रहे सवाल
इसके अलावा, ईरान के नवनिर्वाचित सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई भी अब तक कहां हैं और किस हालात में हैं, इसकी कोई जानकारी नहीं है। सुप्रीम लीडर नियुक्त किए जाने के बाद न तो उन्होंने देश को संबोधित किया और न ही उनकी कोई तस्वीर सामने आई है। अमेरिका का दावा है कि हमले में वे बुरी तरह घायल हो चुके हैं। वहीं, कई रिपोर्ट्स ने जानकारी दी थी कि रूस में उनका इलाज चल रहा है। हालांकि, पुख्ता तौर पर नए सुप्रीम लीडर के बारे में ईरान कुछ भी जानकारी शेयर नहीं कर रहा।
नए सुप्रीम लीडर के समर्थन में सड़कों पर उतरे ईरान के लोग।
'सच्चाई छुपा रहा ईरान'
वहीं,अगर मुजतबा के पिता को दफनाने का निर्णय लिया जाता है तो उन्हें उसे अपनी अनुपस्थिति को लेकर भी स्पष्टीकरण देना होगा। तालेब्लू ने कहा, "इस्लामिक रिपब्लिक सड़कों पर अपना दबदबा दिखाने की बड़ी-बड़ी बातें करता है, लेकिन 50 दिनों का इंटरनेट बंद ही सब कुछ साफ कर देता है। शासन को सच सामने आने के परिणामों का डर है।”कई मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ईरान, अयातुल्ला अली खामेनई को दफनाने के लिए पूर्वोत्तर शहर मशहद में जगह तलाश रहा है। यह खामेनेई का गृह नगर है और ईरान की तुर्कमेनिस्तान सीमा पर स्थित है, जो इजरायल से काफी दूर है।
