Argentina World Cup Win and Financial Crisis:लियोन मेसी (Lionel Messi) की अगुआई में अर्जेंटीना ने 36 साल बाद विश्व कप जीत लिया है। इस जीत से पूरे अर्जेंटीना में खुशी की लहर दौर गई है। अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनर्स आयर्स में लाखों लोग जश्न मनाने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। ऐसे ही जश्न,अर्जेंटीना के दूसरे शहरों में भी हो रहे हैं। डिएगो मेराडोना के बाद (1986 ) मेसी ने विश्व कप जीतने का कारनामा दिखाया है। लंबे समय से विश्व कप का इंतजार और 3 साल से चल रहे आर्थिक संकट के बीच यह जीत अर्जेंटीना वासियों के जख्मों पर मरहम लगाने जैसी है। क्योंकि अर्जेंटीना बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, बढ़ती गरीबी के ऐसे कुचक्र में फंस गया है कि लोग इससे ऊबर नहीं पा रहे हैं।
अर्जेंटीना में आर्थिक हालात बेहद खराब
सबसे लंबे समय तक मंदी में रहने वाला देश
विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार साल 1950 के बाद से अर्जेंटीना सबसे ज्यादा लंबे समय से आर्थिंक मंदी में रहने वाला देश है। मौजूदा समय में अर्जेंटीना 2018 से आर्थिक मंदी के चपेट में है। उसके बाद कोरोना और फिर रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण स्थिति और बिगड़ गई। हालात यह है कि 2019 के आम चुनाव के बाद वहां पर सरकार डिफॉल्ट कर गई थी।
92 फीसदी के दर पर महंगाई
अर्जेंटीना में महंगाई का आलम यह है कि वह नवंबर के महीने में 92.4 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई है। और ऐसी संभावना है कि दिसंबर के महीने में यह 100 फीसदी का स्तर भी पार कर सकती है। G-20 देशों में अर्जेंटीना सबसे ज्यादा महंगाई वाले देशों में हैं। वहीं अगर भारत की महंगाई दर से तुलना की जाय तो यह करीब 15 गुना ज्यादा है। नवंबर में भारत में रिटेल महंगाई दर 5.88 फीसदी थी।
40 फीसदी आबादी गरीब
अर्जेंटीना पर आर्थिक मंदी का ऐसा असर हुआ है कि वहां पर गरीबों की संख्या बढ़ती जा रही है।वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार 2018 के पहले अर्जेंटीना की 25 फीसदी आबादी गरीब थी। जो कि इन 3 वर्षों में बढ़कर 40 फीसदी पहुंच गई है। हालत यह है कि सरकार ने बीते नवंबर में 1500 जरूरी वस्तुओं की कीमतों को फ्रीज कर दिया है। यानी कंपनियां अब उनकी कीमतें नहीं बढ़ा पाएंगी। क्योंकि वह पहले से ही लोगों की जेब से बाहर हो गई हैं।
कमोजर हो गई है अर्जेंटीना की मुद्रा
आर्थिक मंदी का ही असर है कि अर्जेंटीना की मुद्रा डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होती जा रही है। इस समय एक डॉलर के मुकाबले अर्जेंटीना की मुद्रा पीसो वैल्यु 172 के स्तर को पार कर गई है। जिसकी वजह से उसका आयात लगातार महंगा होता जा रहा है।
