What is Festive Flu: इंग्लैंड भर के अस्पताल इन दिनों वायरल फीवर के मरीजों से भरे हैं। यहां 'फेस्टिव फ्लू' और अन्य सर्दियों के वायरस के मामलों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। यही वजह है कि, राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) को डेटा जारी करना पड़ा। कहा गया है कि, पिछले सप्ताह औसतन लगभग 1,900 अस्पताल के बिस्तर फ्लू के रोगियों से भरे हुए थे। वहीं, पिछले सप्ताह की तुलना में 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है जो कि, पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में तीन गुना अधिक है। डॉक्टरों ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि, वे अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या के साथ-साथ फ्लू के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। एनएचएस इंग्लैंड के प्रोफेसर सर स्टीफन पॉविस ने इस बीमारी को 'क्वाड-डेमिक' कहा है।
Festive Flu क्या है
सर्दी के महीनों में होने वाले मौसमी फ्लू के मामलों में वृद्धि को ही फेस्टिव फ्लू नाम दिया गया है। ये छुट्टियों के दौरान होने वाली भीड़-भाड़ और ठंडे मौसम के कारण और खतरनाक हो जाता है। अमेरिकन लंग एसोसिएशन के अनुसार, यह कोई विशेष बीमारी नहीं है बल्कि सर्दी, फ्लू और अन्य श्वास संबंधी बीमारियों जैसे संक्रमणों का एक मिश्रण है। खांसी, गले में खराश, छींकना, नाक बहना, आंखों से पानी आना, बुखार और शरीर में दर्द इस फ्लू के प्रमुख लक्षणों में से एक हैं। पल्मोनरी विशेषज्ञ डॉ. सेड्रिक जेमी इसके लिए नींद की कमी, डिहाइड्रेशन, खराब पोषण और शोर जैसे कारकों को इसका जिम्मेदार मानते हैं।
इनकी भी सुनिए
दरअसल, एनएचएस के स्टीफन पॉविस ने फ्लू की इस स्थिति को चिंताजनक बताया। उन्होंने अस्पतालों पर पड़ रहे दबाव को मौसमी बीमारियों की बड़ी लहर बताया। पॉविस ने कहा, 'ये आंकड़े हमारी क्वाड-डेमिक चिंताओं को बढ़ा रहे हैं। जबकि एनएचएस ने व्यस्त सर्दियों की अवधि में अतिरिक्त मांग का प्रबंधन करने की योजना बनाई है, मैं आपके टीके लगवाने के महत्व पर पर्याप्त जोर नहीं दे सकता। बुकिंग के लिए एक सप्ताह शेष होने के साथ गंभीर बीमारी से खुद को बचाना और फेस्टिव फ्लू से बचना महत्वपूर्ण है।' इंग्लैंड के स्वास्थ्य सचिव वेस स्ट्रीटिंग ने कहा कि 'एनएचएस रिकॉर्ड उपचार दे रहा है और वेटिंग लिस्ट को कम कर रहा है।
सोशल मीडिया पर क्यों हो रहा ट्रेंड
द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह इंग्लैंड में औसतन 837 अस्पताल के बिस्तरों पर प्रतिदिन डायरिया या उल्टी जैसे लक्षणों वाले मरीज भर्ती थे, जबकि इससे पिछले सप्ताह यह संख्या 756 थी। आरएसवी से पीड़ित बच्चों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। ये संख्या पिछले सप्ताह औसतन 152 थी, जबकि इससे पहले सप्ताह में यह संख्या 142 थी तथा पिछले वर्ष इसी समय यह संख्या 107 थी। यही वजह है कि, इंग्लैंड में लोग सोशल मीडिया पर Hashtag के जरिए एक-दूसरे को जागरूक कर रहे हैं।
