आज अप्रैल फूल डे है, आज का दिन लोगों को मूर्ख बनाने के लिए होता है। जहां लोग अपने प्रैंक से एक-दूसरे को फूल बनाते हैं। बचपन में तो आपने और हमने इस दिन का भरपूर सदुपयोग किया है और अपने यार दोस्तों को खूब मूर्ख बनाया है। बचपन के कई प्रैंक तो काफी मशहूर भी हो गए। जैसे पेंसिल के छिलके को दूध में डालने से रबर बनता है। शक्तिमान की तरह आकाश में उड़ने की ट्रिक्स और ना जाने क्या-क्या और कैसे-कैसे प्रैंक्स को हमने सच ही मान लिया था। आज हम आपको ऐसे ही कुछ प्रैंक्स के बारे में बताएंगे, जो इस दुनिया में अब तक के सबसे बड़े प्रैंक माने जाते हैं और इन प्रैंक्स को लोगों ने सच भी मान लिया था।
अप्रैल फूल्स डे (image credit - iStock)
टेलीविजन (सांकेतिक तस्वीर, image credit - iStock)
सादे टीवी को रंगीन बनाने का प्रैंक (1962)
क्या कभी नायलॉन की जुराब से किसी टीवी का रंग बदल सकता है। आज के समय में इसे सुनते ही लोग नाकार देंगे, मगर एक समय ऐसा भी था, जब लोग टीवी और मीडिया पर आंख बंद कर भरोसा कर लेते थे और इसी भरोसे का फायदा उठाकर मीडिया संस्थानों ने कई बार अप्रैल फूल डे के मौके पर लोगों को अप्रैल फूल बनाया। 1962 में कुछ ऐसा ही स्वीडन के एक टीवी चैनल ने किया। जहां उसने अप्रैल फूल डे के मौके पर अपने दर्शकों को बताया कि अगर वे टीवी स्क्रीन पर नायलॉन की जुराब रख दें, तो उनका ब्लैक-एंड-व्हाइट टीवी रंगीन हो जाएगा। हजारों लोगों ने यह ट्रिक आजमाई, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि यह सिर्फ मजाक था।पेड़ों पर उगने लगी स्पेगेटी (1957)
कुछ ऐसा ही काम साल 1957 में BBC वालों ने भी किया था, जहां उन्होंने एक टीवी रिपोर्ट दिखाई, जिसमें बताया गया कि स्विट्जरलैंड में पेड़ों पर स्पेगेटी उग रही है। इस खबर को देखकर कई लोग इसे सच मान बैठे और BBC को फोन करके पूछने लगे कि स्पेगेटी का पेड़ कैसे उगाया जा सकता है।(सांकेतिक तस्वीर, image credit - iStock)
उड़ने वाले पेंगुइन (2008)
BBC ने ही 2008 में एक और मजेदार वीडियो जारी किया, जिसमें दिखाया गया कि पेंगुइन उड़ सकते हैं और वे दक्षिण अमेरिका तक उड़कर चले जाते हैं। बाद में लोगों को पता चला कि यह अप्रैल फूल का मजाक था।(सांकेतिक तस्वीर, image credit - iStock)
मीट्रिक समय की घोषणा (1975)
सोचिए अगर आपसे कोई कहे कि आज के बाद से समय का हर एक मापदंड बदल जाएगा। जैसे एक मिनट में 100 सेकंड और एक घंटे में 100 मिनट होंगे तो आज के समय में शायद ही आप इस पर भरोसा करेंगे लेकिन साल 1975 में ऑस्ट्रेलिया के एक टीवी चैनल ने कुछ ऐसी ही घोषणा की थी। जहां उस चैनल ने बताया था कि देश में अब मीट्रिक समय का पालन किया जाएगा। जहां एक मिनट में 100 सेकंड और एक घंटे में 100 मिनट होंगे, यह सुनकर लोगों का सिर चकरा गया और उन्हें लगा कि शायद अब से कुछ ऐसा ही होगा।(सांकेतिक तस्वीर, image credit - iStock)
गूगल का जीमेल ऐलान (2004)
टेक कंपनी Google हर साल अप्रैल फूल के दिन कुछ ना कुछ मजेदार प्रोडक्ट या फीचर की घोषणा करती है। जो बाद में एक प्रैंक साबित होता है। ऐसे में एक बार गूगल ने कुछ ऐसा ही ऐलान किया, जिसे पहले तो लोगों ने प्रैंक माना लेकिन बाद में वह सच निकला। दरअसल, गूगल ने 1 अप्रैल को जीमेल लॉन्च किया था, जिसे शुरुआत में लोगों ने मजाक समझा क्योंकि इसकी कैपेसिटी 1GB थी, जो कि उस समय के हिसाब से ऐसा होना अविश्वसनीय माना जाता था। मगर जिसे लोग प्रैंक समझ रहे थे, वह असल में सच हो गया।(सांकेतिक तस्वीर, image credit - iStock)
टाउनटाउन स्लीपिंग बैग (2009)
खिलौने बेचने वाली वेबसाइट 'ThinkGeek.com' ने स्टार वार्स फिल्म के एक सीन पर आधारित स्लीपिंग बैग बेचने का मजाक किया, लेकिन लोगों के बीच उसकी जबरदस्त मांग को देखते हुए बाद में उन्हें आखिरकार इसे बनाना ही पड़ा।डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। टाइम्स नाउ नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।
