Train vs Car Mileage: ट्रेन का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में लंबी दूरी तय करती हुई एक बड़ी गाड़ी और उसमें सफर करते सैकड़ों लोग याद आते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जैसे कार और बाइक माइलेज देती हैं, क्या ट्रेन भी माइलेज देती है? इसका जवाब है—हां, ट्रेन भी माइलेज देती है, बस इसे समझने का तरीका थोड़ा अलग होता है। हम आमतौर पर कार और बाइक का माइलेज 'किलोमीटर प्रति लीटर' में मापते हैं, यानी एक लीटर पेट्रोल या डीजल में गाड़ी कितनी दूरी तय करती है।
ट्रेन का माइलेज जानकर चौंक जाएंगे आप (Photo: iStock)
एक डीजल ट्रेन चल सकती है औसतन 4 से 5 किलोमीटर प्रति लीटर तक
ट्रेन के मामले में भी यही होता है, लेकिन यहां पूरा इंजन और कई डिब्बे एक साथ चलते हैं। एक डीजल ट्रेन औसतन 4 से 5 किलोमीटर प्रति लीटर तक चल सकती है। पहली नजर में यह आंकड़ा कम लग सकता है, लेकिन असली बात तब समझ आती है जब हम इसमें सफर करने वाले लोगों की संख्या पर ध्यान देते हैं। एक ट्रेन में एक साथ सैकड़ों यात्री सफर करते हैं। अगर हम ईंधन की खपत को हर यात्री के हिसाब से बांट दें, तो पता चलता है कि ट्रेन का माइलेज कार और बाइक से कहीं ज्यादा बेहतर होता है। यानी एक व्यक्ति को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में ट्रेन बहुत कम ईंधन खर्च करती है।
ट्रेन को माना जाता है सस्ता और सुविधाजनक साधन
इसके अलावा ट्रेन की बनावट भी इसे ज्यादा किफायती बनाती है। ट्रेन के पहिए स्टील के होते हैं और पटरी भी स्टील की होती है, जिससे घर्षण बहुत कम होता है। कम घर्षण का मतलब है कम ऊर्जा की जरूरत और ज्यादा दूरी तय करने की क्षमता। साथ ही ट्रेन लंबी दूरी तक एक समान गति से चलती है, जिससे ईंधन की बचत होती है। इसी वजह से ट्रेन को सस्ता और सुविधाजनक यात्रा साधन माना जाता है। यह न सिर्फ जेब के लिए फायदेमंद है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर है, क्योंकि इससे प्रति व्यक्ति कम प्रदूषण होता है। आसान भाषा में कहें तो ट्रेन का माइलेज कम नहीं होता, बल्कि सही तरीके से देखा जाए तो यह सबसे ज्यादा असरदार होता है।
