वायरल न्यूज (Viral News): जिंदगी में मुश्किलें हर किसी के सामने आती हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो इन मुश्किलों को अपनी ताकत बना लेते हैं। फिर ऐसे लोगों के सामने मुश्किलें कुछ भी नहीं रह जातीं। ऐसी ही एक शख्स की प्रेरणादायक कहानी को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने वीडियो (Video) के जरिए शेयर किया है। इस शख्स का नाम हरी बुद्धा मगर (Hari Budha Magar) है। दरअसल, इस शख्स ने अपने दोनों पैर गंवाने के बाद भी हार नहीं मानी और इस दुनिया को वह कर दिखाया जिस बारे में कोई सोच भी नहीं सकता।
दोनों पैर नहीं, फिर भी दुनिया के शिखर पर पहुंचा यह जांबाज (Instagram/@GWR/AI Generated Image)
बम धमाके ने छीने पैर, लेकिन नहीं छीन सका हौसला
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guinness world record) को दिए गए एक इंटरव्यू में हरी बुद्धा मगर ने बताया कि उनका जन्म नेपाल के एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें पहाड़ों से लगाव था। बड़े होकर वे ब्रिटिश आर्मी की प्रसिद्ध गोरखा रेजिमेंट में शामिल हुए। इस रेजिमेंट में शामिल होने के लिए 12000 आवेदकों ने आवेदन दिए थे, जिनमें से मात्र 230 लोगों का चयन हुआ था और उस लिस्ट में हरी बुद्धा मगर का भी नाम शुमार था। अपनी नौकरी क दौरान साल 2010 में उनकी ड्यूटी अफगानिस्तान में लगी थी। इसी दौरान एक आईईडी ब्लास्ट में उनके घुटने से नीचे के दोनों पैर उड़ गए। जिसके बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई।
पहाड़ चढ़ते हरी बुद्धा मगर
जहां लोग हार मान लेते हैं, वहां से शुरू हुआ इनका सफर
ऐसा हादसा किसी भी इंसान के लिए बहुत बड़ा झटका होता है। आमतौर पर लोग ऐसी स्थिति में अपने सपने तो क्या जीने की चाहत भी छोड़ देते हैं लेकिन हरी ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने यह तय कर लिया कि वे हार नहीं मानेंगे। शुरुआत में उनका लक्ष्य सिर्फ इतना था कि वे खुद से व्हीलचेयर तक पहुंच सकें लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपने अंदर फिर से हिम्मत जगाई और अपने पुराने सपने को याद किया। उनका बचपन का सपना था कि वे एक दिन दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ेंगे। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने प्रोस्थेटिक पैरों की मदद ली और कृत्रिम पैर लगवाएं। अपने इन्हीं कृत्रिम पैरों की मदद से उन्होंने पहाड़ चढ़ने की कठिन ट्रेनिंग शुरू की। उनके लिए यह आसान नहीं था, क्योंकि पहाड़ चढ़ने में सबसे ज्यादा संतुलन, ताकत और धैर्य की जरूरत होती है लेकिन हरी ने अपनी मेहनत और जिद से हर एक मुश्किल को पार कर लिया।
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दुनिया की 7 सबसे ऊंची चोटियां की फतह
मई 2023 में उन्होंने माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर इतिहास रच दिया। वे ऐसे पहले व्यक्ति बने, जिन्होंने दोनों पैर खोने के बावजूद एवरेस्ट की चोटी पर कदम रखा। लेकिन उनका सफर यहीं खत्म नहीं हुआ। उन्होंने दुनिया के सात महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों यानी ‘सेवन समिट्स’ को फतह करने का लक्ष्य बनाया। जिनमें किलिमंजारो (Kilimanjaro), डेनाली (Denali), अकोंकागुआ (Aconcagua), माउंट विंसन (Mount Vinson), कार्स्टेन्ज पिरामिड (Carstensz Pyramid) और मोंट ब्लांक (Mont Blanc) जैसी कठिन चोटियां शामिल हैं।
बनाया 5 वर्ल्ड रिकॉर्ड
जनवरी 2026 में अंटार्कटिका की माउंट विंसन पर चढ़ाई के साथ उन्होंने यह मिशन पूरा कर लिया और दुनिया के पहले डबल एम्प्यूटी पर्वतारोही बन गए, जिन्होंने सेवन समिट्स फतह किए। हरी के नाम अब पांच गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guinness World Records) दर्ज हैं साथ ही उन्हें ‘ICON’ सम्मान से भी नवाजा गया है। हरी का कहना है कि उनका मकसद सिर्फ रिकॉर्ड बनाना नहीं है, बल्कि लोगों को यह दिखाना है कि दिव्यांगता कमजोरी नहीं होती। अगर इंसान का हौसला मजबूत हो, तो वह कुछ भी हासिल कर सकता है।
