कहते हैं कि जब किसी अपने के लिए कुछ करने का जज्बा हो, तो मुश्किल से मुश्किल काम भी आसान लगने लगता है। ऐसा ही एक दिल छू लेने वाला मामला आंध्र प्रदेश से सामने आया है, जहां एक 65 साल के मैकेनिक ने अपनी पत्नी की परेशानी दूर करने के लिए ऐसा काम किया, जिसकी लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक बुजुर्ग महिला घर की सीढ़ियां चढ़ने के लिए एक अनोखे देसी एस्केलेटर का इस्तेमाल करती नजर आ रही है। यह मशीन किसी बड़ी कंपनी ने नहीं, बल्कि उनके पति ने अपने हाथों से बनाई है।
आंध्र प्रदेश के 65 वर्षीय मैकेनिक सत्ती शिवा नारायण रेड्डी और उनकी पत्नी सत्यवेणी (X/@TGGovtUpdates)
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें:
पत्नी की परेशानी देख आया अनोखा आइडिया
यह मामला आंध्र प्रदेश के ईस्ट गोदावरी जिले के अर्थमुरु गांव का है। यहां रहने वाले 65 वर्षीय मैकेनिक सत्ती शिवा नारायण रेड्डी ने अपनी 58 वर्षीय पत्नी सत्यवेणी के लिए यह खास सिस्टम तैयार किया है। बताया जा रहा है कि उनके घर की पहली मंजिल तक पहुंचने के लिए 21 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थीं। उम्र बढ़ने के कारण उनकी पत्नी को सीढ़ियां चढ़ने में काफी दिक्कत होती थी। अपनी पत्नी की तकलीफ देखकर रेड्डी ने फैसला किया कि वह इसका कोई समाधान जरूर निकालेंगे।
अपने हाथों से बना दिया एस्केलेटर
रेड्डी पेशे से मैकेनिक हैं। उन्होंने अपने अनुभव और हुनर का इस्तेमाल करते हुए घर में ही एक छोटा-सा एस्केलेटर तैयार कर दिया। यह मशीन इस तरह बनाई गई है कि उनकी पत्नी आराम से उस पर खड़े होकर पहली मंजिल तक पहुंच सकती हैं। इससे उन्हें सीढ़ियां चढ़ने की जरूरत नहीं पड़ती और रोज की परेशानी भी काफी कम हो गई है।
सोशल मीडिया पर लोग कर रहे तारीफ
जैसे ही इस अनोखे आविष्कार का वीडियो सोशल मीडिया पर आया, लोगों ने इसकी खूब तारीफ की। फिलहाल यह वीडियो धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा है। वीडियो को हमने सोशल साइट एक्स पर पोस्ट @TGGovtUpdates नामक अकाउंट से लिया है। इस वीडियो पर बड़ी संख्या में लोगों ने कमेंट भी किया है। जहां कई यूजर्स ने लिखा कि यह सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि पति का अपनी पत्नी के प्रति प्यार और देखभाल का सबसे खूबसूरत उदाहरण है। एक यूजर ने लिखा, "इसे कहते हैं सच्चा प्यार, जहां समस्या देखी और खुद समाधान बना दिया।" दूसरे ने लिखा, "बड़े-बड़े इंजीनियर भी ऐसी सोच नहीं रखते।" वहीं कई लोगों ने कहा कि अगर ऐसे कम लागत वाले उपकरण बड़े स्तर पर बनाए जाएं, तो बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों को काफी मदद मिल सकती है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। टाइम्स नाउ नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।
