Ajab Gajab: चीन के एक बोर्डिंग स्कूल को इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। घटना की इतनी अजब है कि, यूजर्स बिना कमेंट किए रह नहीं पा रहे हैं। दरअसल, रात में स्टूडेंट द्वारा टॉयलेट का इस्तेमाल करने पर उसे स्कूल प्रबंधन ने कठोर सजा सुनाई। इसके बाद से ही कर्मचारियों ने कड़ी आलोचना का सामना किया। हुआ यूं कि, छात्र रात 11 बजे वॉशरूम गया था, जिसे लेकर उसे खूब डांटा गया। इस घटना को कई लोगों ने जेल जैसा माहौल बताया है, जिससे लोगों में गुस्सा भड़क गया है।
बीजिंग न्यूज़ के अनुसार, एक शिक्षक ने बताया कि छात्र रात 10.45 बजे के बाद हॉस्टल में नहीं घूम सकते हैं और उस दौरान टॉयलेट का उपयोग करने पर प्रतिबंध हैं। कथित तौर पर छात्रों को शौचालय का उपयोग करने के लिए छात्रावास प्रशासकों से अनुमति लेनी होगी। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) के अनुसार लड़के को एक गहन आत्म-चिंतन पत्र लिखने के लिए कहा गया था और उसे अपने साथियों के बीच 1,000 प्रतियां वितरित करने का निर्देश दिया गया था। इस कृत्य पर उसकी कक्षा के मंथली डिसिप्लेन स्कोर से भी अंक काटे गए थे।
सजा में दिए पत्र पर छात्र ने लिखा, 'मैंने स्कूल के नियमों का गंभीर उल्लंघन किया है और शाम को टॉयलेट जाने से न केवल अन्य छात्रों की नींद में व्यवधान पड़ा, बल्कि मेरी कक्षा की भी बदनामी हुई।' दावा है कि, छात्र ने अपने टीचर और सहपाठियों से भी माफी मांगी और भविष्य में इस प्रकार की गलती को न दोहराने का भी वादा किया।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने बताया कि एक व्यक्ति ने चीनी सोशल मीडिया डोयिन पर लिखा, 'मुझे समझ में नहीं आता कि रात 11 बजे के बाद शौचालय जाना स्कूल के नियमों का उल्लंघन क्यों है। उन्हें कब जाना है, इस पर कौन नियंत्रण कर सकता है?' दूसरे यूजर ने कहा कि, 'इतने सख्त नियमों के साथ यह स्कूल जेल जैसा दिखता है।' आक्रोश के बाद, हुआइरेन के शिक्षा विभाग ने संस्थान से अपनी गलतियों पर विचार करने को कहा। हिन्दुस्तान टाइम्स ने आउटलेट की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि, शिक्षा प्राधिकरण ने कहा' 'हमने स्कूल को इस घटना से सीख लेने और अपनी गलतियों पर विचार करने का निर्देश दिया। हमने उन्हें अपनी अनुशासन नीतियों को संशोधित करने के लिए कहा।' साथ ही साथ स्कूल को आदेश दिया गया है कि, छात्र को उसकी 1,000 प्रतियों के एवज में 100 युआन (US$14) का भुगतान किया जाए। वहीं, अधिकारियों ने कथित तौर पर क्षेत्र के सभी स्कूलों को उचित और मानवीय अनुशासन नीतियां लागू करने का निर्देश दिया है।
(डिस्क्लेमर: यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल दावों के आधार पर लिखी गई है। अत: टाइम्स नाउ नवभारत इसकी सत्यता अथवा किसी दावे की पुष्टि नहीं करता है।)
