देश के कई हिस्सों में अब पारंपरिक बिजली मीटर की जगह स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। इन मीटरों में बिजली की खपत के हिसाब से रियल टाइम में बैलेंस या भुगतान की जानकारी अपडेट होती रहती है। हालांकि, कई उपभोक्ताओं को कभी-कभी यह शिकायत रहती है कि स्मार्ट मीटर में अचानक उम्मीद से ज्यादा बैलेंस कट गया। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि बैलेंस कम होने के पीछे केवल मीटर की खराबी ही जिम्मेदार नहीं होती, बल्कि बिजली की खपत और बिलिंग से जुड़ी कई वजहें हो सकती हैं।
हर बार मीटर की गलती नहीं होती
ज्यादा बिजली खपत होने पर तेजी से घटता है बैलेंस
स्मार्ट मीटर प्रीपेड सिस्टम में अक्सर बिजली की वास्तविक खपत के आधार पर बैलेंस काटता है। अगर घर में AC, गीजर, हीटर, कूलर, फ्रिज या दूसरे ज्यादा बिजली खपत करने वाले उपकरण लंबे समय तक चल रहे हैं, तो बैलेंस सामान्य दिनों की तुलना में तेजी से कम हो सकता है। खासकर गर्मी और सर्दी के मौसम में बिजली की खपत बढ़ने पर यह अंतर ज्यादा नजर आता है।
पुराने बकाया की कटौती भी हो सकती है वजह
कुछ मामलों में स्मार्ट मीटर लगने या प्रीपेड सिस्टम में शिफ्ट होने के बाद पुराने बकाया बिल की राशि भी एडजस्ट की जा सकती है। ऐसी स्थिति में रिचार्ज करने के बाद दिखाई देने वाला बैलेंस उम्मीद से कम हो सकता है। इसलिए उपभोक्ताओं को यह जांचना चाहिए कि खाते में कोई पुराना बकाया या एडजस्टमेंट तो नहीं दिख रहा है।
फिक्स चार्ज और दूसरे शुल्क भी होते हैं
सिर्फ इस्तेमाल की गई बिजली के यूनिट के लिए ही पैसा नहीं कटता। बिजली कनेक्शन के नियमों के अनुसार फिक्स्ड चार्ज, मीटर चार्ज या अन्य लागू शुल्क भी बिलिंग में शामिल हो सकते हैं। प्रीपेड स्मार्ट मीटर में इनकी कटौती उपलब्ध बैलेंस से हो सकती है। इसलिए बैलेंस कम होने का मतलब हमेशा यह नहीं है कि मीटर ने ज्यादा यूनिट रिकॉर्ड की हैं।
टैरिफ बदलने से भी बढ़ सकता है खर्च
बिजली की दरें स्लैब और स्थानीय बिजली वितरण कंपनी के नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। अगर किसी अवधि में लागू टैरिफ या स्लैब बदलता है, तो समान यूनिट खपत पर भी खर्च अलग हो सकता है। यही वजह है कि उपभोक्ताओं को सिर्फ बैलेंस ही नहीं, बल्कि स्मार्ट मीटर ऐप या बिजली कंपनी के पोर्टल पर यूनिट खपत और लागू दर भी देखनी चाहिए।
मीटर खराबी का शक हो तो क्या करें?
अगर बिजली की खपत सामान्य है, लेकिन स्मार्ट मीटर लगातार असामान्य तेजी से बैलेंस काट रहा है, तो उपभोक्ता को पहले पिछले दिनों की यूनिट खपत की तुलना करनी चाहिए। इसके बाद संबंधित बिजली वितरण कंपनी के कस्टमर केयर या शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर मीटर की जांच भी कराई जा सकती है।
हर बार मीटर की गलती नहीं होती
इसलिए स्मार्ट मीटर में अचानक बैलेंस कम होने पर तुरंत मीटर को खराब मान लेना सही नहीं है। पहले बिजली की खपत, पुराने बकाया, फिक्स्ड चार्ज, टैरिफ और अन्य कटौतियों की जानकारी जांचना जरूरी है। अगर इन सबके बावजूद खपत और कटौती में बड़ा अंतर दिखाई देता है, तभी मीटर की जांच के लिए बिजली विभाग से संपर्क करना बेहतर होगा।
