आज के समय में हर व्यक्ति एक उपभोक्ता है। कोई दुकान से सामान खरीदता है, कोई होटल की सेवा लेता है, कोई रेलवे या हवाई यात्रा करता है तो कोई अस्पताल, बैंक और बीमा कंपनियों की सेवाओं का इस्तेमाल करता है। लेकिन परेशानी तब आती है जब कोई कंपनी या सेवा प्रदाता अपने वादे के अनुसार सुविधा नहीं देता, खराब सामान देता है या पैसे लेने के बाद भी सेवा उपलब्ध नहीं कराता।
'Consumer Court' में शिकायत दर्ज कराने का सही नियम क्या है और धोखा खाने पर आप कंपनियों से भारी मुआवजा कैसे ले सकते हैं?
ऐसी स्थिति में उपभोक्ता अधिकारों की जरूरत महसूस होती है। उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े कानून ग्राहकों को उनके अधिकार दिलाने और गलत व्यापारिक गतिविधियों से बचाने का काम करते हैं। आइए जानते हैं कि उपभोक्ता कोर्ट में शिकायत कैसे की जा सकती है, खराब सामान मिलने पर रिफंड कैसे मिल सकता है और उपभोक्ताओं के अधिकार कितने प्रकार के होते हैं।
भारत में उपभोक्ता सुरक्षा के लिए कौन सा कानून है?
भारत में ग्राहकों के हितों की सुरक्षा के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 (Consumer Protection Act 2019) लागू है। इस कानून का उद्देश्य ग्राहकों को धोखाधड़ी, खराब सेवाओं, मिलावटी सामान और भ्रामक विज्ञापनों से बचाना है।
इससे पहले साल 1986 का उपभोक्ता संरक्षण कानून लागू था, लेकिन डिजिटल युग, ऑनलाइन खरीदारी और ई-कॉमर्स के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इसमें बदलाव की जरूरत महसूस हुई। इसके बाद नया कानून लागू किया गया, जो पूरे देश में लागू है। यह कानून उपभोक्ताओं को छह प्रमुख अधिकार देता है, सुरक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार, पसंद का अधिकार, सुनवाई का अधिकार, निवारण का अधिकार और उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार।
सुरक्षा का अधिकार क्या है?
सुरक्षा का अधिकार उपभोक्ताओं को यह सुनिश्चित करता है कि उन्हें ऐसी वस्तुएं और सेवाएं मिलें, जो उनके जीवन और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हों। अगर कोई इलेक्ट्रॉनिक सामान खराब होकर नुकसान पहुंचाता है, कोई दवा नकली निकलती है, कोई केमिकल खतरनाक साबित होता है या खाने की चीज खराब मिलती है, तो ग्राहक इसके खिलाफ शिकायत कर सकता है।
जानकारी पाने का अधिकार
उपभोक्ता को किसी भी उत्पाद या सेवा से जुड़ी पूरी जानकारी पाने का अधिकार है। इसमें सामान की कीमत, गुणवत्ता, मात्रा और उसकी विशेषताओं की जानकारी शामिल है। कई बार कंपनियां विज्ञापनों में बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन असल में उत्पाद या सेवा वैसी नहीं होती। ऐसे मामलों में ग्राहक उपभोक्ता कानून का सहारा ले सकता है।
उपभोक्ता कोर्ट में कैसे होती है सुनवाई?
उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ता आयोग बनाए गए हैं। यहां ग्राहक बिना ज्यादा कानूनी खर्च के अपनी शिकायत दर्ज कर सकता है। यदि शिकायत की राशि 50 लाख रुपये तक है तो मामला जिला उपभोक्ता आयोग में जाता है। वहीं 50 लाख रुपये से अधिक और 2 करोड़ रुपये तक के मामलों की सुनवाई राज्य आयोग करता है। 2 करोड़ रुपये से ज्यादा के दावों की सुनवाई राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में होती है। इसके अलावा अब ऑनलाइन माध्यम से भी उपभोक्ता शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
खराब सेवा या सामान मिलने पर मिल सकता है मुआवजा
अगर किसी कंपनी या सेवा प्रदाता की लापरवाही से ग्राहक को आर्थिक नुकसान, समय की बर्बादी या मानसिक परेशानी होती है तो उपभोक्ता आयोग मुआवजा देने का आदेश दे सकता है। कई लोग यह नहीं जानते कि केवल पैसे का नुकसान ही नहीं, बल्कि मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए भी दावा किया जा सकता है।
कंज्यूमर कोर्ट में कैसे करें शिकायत?
यदि आपको किसी सामान या कंपनी के खिलाफ शिकायत है तो आप https://consumerhelpline.gov.in/public/ पर जाकर अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा 1915 पर कॉल करके, NCH ऐप से और 8800001915 पर मैसेज भेजकर भी आप शिकायत कर सकते हैं।
