आजकल फ्रिज खरीदते समय सिर्फ उसकी क्षमता, डिजाइन या कीमत ही नहीं देखी जाती, बल्कि इन्वर्टर Inverter Technology भी एक अहम फीचर बन गई है। बाजार में इन्वर्टर और नॉन-इन्वर्टर दोनों तरह के रेफ्रिजरेटर उपलब्ध हैं। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल होता है कि आखिर इन्वर्टर फ्रिज क्या होता है और यह सामान्य फ्रिज से कितना अलग है। दोनों का मुख्य अंतर इनके कंप्रेसर के काम करने के तरीके में होता है।
Inverter फ्रिज क्या होता है?
इन्वर्टर फ्रिज में ऐसा कंप्रेसर लगाया जाता है जो जरूरत के हिसाब से अपनी स्पीड को कम या ज्यादा कर सकता है यानी फ्रिज के अंदर तापमान को बनाए रखने के लिए कंप्रेसर हर समय पूरी क्षमता से काम नहीं करता। जब ज्यादा कूलिंग की जरूरत होती है तो कंप्रेसर तेज चलता है और तापमान स्थिर होने पर इसकी स्पीड कम हो जाती है। इस वजह से इन्वर्टर कंप्रेसर बार-बार पूरी तरह बंद और चालू होने के बजाय कम या ज्यादा स्पीड पर लगातार काम कर सकता है। इससे तापमान को ज्यादा स्थिर रखने में मदद मिलती है।
Non-Inverter फ्रिज कैसे काम करता है?
नॉन-इन्वर्टर फ्रिज में आमतौर पर कंप्रेसर एक तय स्पीड पर काम करता है। जब फ्रिज के अंदर का तापमान निर्धारित स्तर से ऊपर जाता है, तो कंप्रेसर पूरी क्षमता से चालू हो जाता है। तापमान वापस सेट स्तर पर पहुंचने के बाद कंप्रेसर बंद हो जाता है यानी इसमें कंप्रेसर का काम मुख्य रूप से ON और OFF तरीके से चलता है। बार-बार शुरू और बंद होने के कारण बिजली की खपत और कंप्रेसर पर लोड इन्वर्टर मॉडल की तुलना में अलग हो सकता है।
बिजली की खपत में क्या फर्क है?
इन्वर्टर फ्रिज का सबसे बड़ा फायदा इसकी ऊर्जा दक्षता मानी जाती है। चूंकि कंप्रेसर जरूरत के हिसाब से अपनी स्पीड बदलता है, इसलिए सामान्य परिस्थितियों में यह अनावश्यक रूप से ज्यादा पावर इस्तेमाल करने से बच सकता है।
नॉन-इन्वर्टर फ्रिज में कंप्रेसर एक निश्चित स्पीड पर चलता है और बार-बार ON-OFF होता है। इसलिए समान परिस्थितियों में इन्वर्टर मॉडल की तुलना में इसकी बिजली खपत ज्यादा हो सकती है। हालांकि, वास्तविक बिजली खपत फ्रिज की क्षमता, स्टार रेटिंग, इस्तेमाल और कमरे के तापमान जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है।
शोर में भी होता है अंतर
इन्वर्टर फ्रिज में कंप्रेसर की स्पीड धीरे-धीरे बदलती है, इसलिए इसका संचालन आमतौर पर ज्यादा शांत होता है। कंप्रेसर के अचानक बार-बार स्टार्ट होने की आवाज भी कम सुनाई दे सकती है। दूसरी ओर, नॉन-इन्वर्टर फ्रिज में कंप्रेसर के ON और OFF होने पर आवाज महसूस हो सकती है। हालांकि, आधुनिक नॉन-इन्वर्टर फ्रिज भी पहले के मुकाबले काफी शांत हो सकते हैं।
कूलिंग के मामले में कौन बेहतर?
इन्वर्टर फ्रिज तापमान को अपेक्षाकृत स्थिर रखने में बेहतर हो सकता है। कंप्रेसर जरूरत के अनुसार अपनी स्पीड एडजस्ट करता रहता है, जिससे फ्रिज के अंदर अचानक ज्यादा ठंडा या कम ठंडा होने की स्थिति कम हो सकती है। नॉन-इन्वर्टर फ्रिज में कंप्रेसर के ON और OFF होने के कारण तापमान में थोड़ा ज्यादा उतार-चढ़ाव हो सकता है। हालांकि, अच्छी क्वालिटी वाले फ्रिज में यह अंतर हर उपयोगकर्ता को स्पष्ट रूप से महसूस हो, यह जरूरी नहीं है।
कीमत और मेंटेनेंस में क्या अंतर?
इन्वर्टर टेक्नोलॉजी वाले फ्रिज की शुरुआती कीमत अक्सर नॉन-इन्वर्टर मॉडल से ज्यादा होती है। इसकी वजह ज्यादा एडवांस कंप्रेसर और कंट्रोल सिस्टम है। हालांकि, अगर फ्रिज लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाता है और बिजली की बचत होती है, तो शुरुआती अतिरिक्त खर्च की भरपाई समय के साथ हो सकती है। नॉन-इन्वर्टर फ्रिज आमतौर पर कम शुरुआती कीमत में मिल जाते हैं। वहीं, किसी भी फ्रिज की मेंटेनेंस लागत उसके ब्रांड, मॉडल, खराबी और इस्तेमाल पर निर्भर करती है।
Inverter या Non-Inverter, कौन सा फ्रिज खरीदें?
अगर आपका बजट थोड़ा ज्यादा है और आप फ्रिज को लंबे समय तक इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं, तो इन्वर्टर फ्रिज बेहतर विकल्प हो सकता है। यह कम बिजली खपत, स्थिर कूलिंग और अपेक्षाकृत शांत संचालन जैसे फायदे देता है।
वहीं, अगर आपकी प्राथमिकता कम शुरुआती कीमत है और बिजली की बचत आपकी पहली चिंता नहीं है, तो नॉन-इन्वर्टर फ्रिज भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। खरीदारी के समय सिर्फ इन्वर्टर टेक्नोलॉजी ही नहीं, बल्कि BEE स्टार रेटिंग, क्षमता, वारंटी और बिजली की अनुमानित सालाना खपत भी जरूर देखें।
