LPG का सस्ता विकल्प केरोसिन और कोयला, इस्तेमाल करने के साथ सुरक्षा का भी रखें ख्याल

एलपीजी की मांग पर दबाव कम करने के लिए सरकार की ओर से केरोसिन (मिट्टी का तेल) और कोयला जैसे वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। दोनों ईंधनों का इस्तेमाल करते समय सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। केरोसिन को सुरक्षित कंटेनर में रखा जाना चाहिए और कोयले का इस्तेमाल बंद कमरे में नहीं करना चाहिए।

देश में एलपीजी की बढ़ती मांग और कीमतों के कारण वैकल्पिक ईंधन अपनाना जरूरी हो गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 48,000 किलोलीटर केरोसिन का अतिरिक्त आवंटन किया गया है और एलपीजी की मांग पर दबाव कम करने के लिए केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। दरअसल, वर्तमान परिस्थितियों में केरोसिन (मिट्टी का तेल) और कोयला ऐसे विकल्प हैं, जिनका सही तरीके से इस्तेमाल कर रसोई की जरूरतें पूरी की जा सकती हैं। हालांकि, इनका इस्तेमाल समझदारी और सावधानी के साथ करना जरूरी है-

Safety Guide for Using Kerosene and Coal

Kerosene और Coal का सुरक्षित इस्तेमाल (Photo: iStock)

केरोसिन का इस्तेमाल कैसे करें

केरोसिन का इस्तेमाल मुख्य रूप से स्टोव के जरिए किया जाता है। बाजार में विक (बत्ती वाले) और प्रेशर स्टोव दो तरह के स्टोव मिलते हैं। इस्तेमाल के लिए स्टोव के टैंक में साफ केरोसिन भरा जाता है। बत्ती वाले स्टोव में बत्ती को सही स्तर तक ऊपर रखकर जलाया जाता है। प्रेशर स्टोव में पहले हवा भरकर दबाव बनाया जाता है, फिर उसे जलाया जाता है। खाना पकाते समय ध्यान रखें कि स्टोव समतल जगह पर रखा हो और आसपास ज्वलनशील वस्तुएं न हों। इसके साथ ही बेहतर वेंटिलेशन बहुत जरूरी है, क्योंकि केरोसिन जलने पर हल्का धुआं और गंध पैदा करता है।

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