राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर करने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने टोल शुल्क की गणना के नियमों में बदलाव करते हुए नई व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बदलाव के बाद ऐसे हाईवे, जिनमें ब्रिज, टनल, फ्लाईओवर या एलिवेटेड रोड शामिल हैं, वहां कई मामलों में यात्रियों को पहले के मुकाबले कम टोल चुकाना पड़ सकता है। NHAI ने अपने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को संशोधित नियमों के अनुसार टोल नोटिफिकेशन और शुल्क संशोधन की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
1 जुलाई से बदले गए हैं टोल शुल्क के नियम
1 जुलाई से बदले गए हैं टोल शुल्क के नियम
यह बदलाव सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 1 जुलाई को नेशनल हाईवे फीस (निर्धारण और संग्रह) नियम, 2008 में किए गए संशोधन के बाद किया गया है। नए नियम के तहत अब उन हाईवे सेक्शन पर टोल की गणना का तरीका बदल जाएगा, जहां एक या अधिक स्वतंत्र ब्रिज, टनल, फ्लाईओवर या एलिवेटेड हाईवे मौजूद हैं।
अब कैसे तय होगा टोल?
संशोधित नियम के अनुसार टोल योग्य दूरी की गणना दो तरीकों से की जाएगी। पहला, विशेष संरचनाओं (ब्रिज, टनल, फ्लाईओवर या एलिवेटेड रोड) की कुल लंबाई का 10 गुना और उसमें सामान्य सड़क की लंबाई जोड़कर। दूसरा, पूरे हाईवे सेक्शन की कुल लंबाई का 5 गुना। इन दोनों में जो दूरी कम होगी, उसी के आधार पर टोल वसूला जाएगा। इसके अलावा, 60 मीटर या उससे कम लंबाई वाले ब्रिज या अन्य ढांचे को अलग संरचना नहीं माना जाएगा और उनकी अलग से गणना नहीं की जाएगी।
उदाहरण से समझें नया फॉर्मूला
सरकार द्वारा जारी गजट अधिसूचना में नए नियम को उदाहरण के जरिए समझाया गया है। यदि किसी 40 किलोमीटर लंबे हाईवे में 30 किलोमीटर ब्रिज, टनल या एलिवेटेड स्ट्रक्चर और 10 किलोमीटर सामान्य सड़क है, तो पहले टोल योग्य दूरी 310 किलोमीटर के आधार पर बनती थी, लेकिन नए नियम के तहत यह घटकर 200 किलोमीटर मानी जाएगी, क्योंकि दोनों गणनाओं में कम दूरी को आधार बनाया जाएगा।
इसी तरह, यदि 40 किलोमीटर के हाईवे में 10 किलोमीटर विशेष संरचना और 30 किलोमीटर सामान्य सड़क है, तो पहले जहां 200 किलोमीटर के आधार पर शुल्क तय हो सकता था, वहीं अब टोल योग्य दूरी 130 किलोमीटर होगी।
यात्रियों को मिलेगा सीधा फायदा
पूर्व NHAI अधिकारी और ITS India Forum के अध्यक्ष अखिलेश श्रीवास्तव के अनुसार, पहले जिन हाईवे सेक्शन में ब्रिज या टनल की लंबाई अधिक होती थी, वहां टोल की गणना 10 गुना लंबाई के आधार पर होती थी और इसकी कोई अधिकतम सीमा नहीं थी। नए नियम में अब अधिकतम सीमा (Hard Cap) तय कर दी गई है, जिससे हमेशा कम दूरी के आधार पर टोल निर्धारित होगा। इससे यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम होगा।
कब से लागू होंगे नए नियम?
NHAI के अनुसार, सरकारी फंड से बने मौजूदा टोल प्लाजा पर यह नया फॉर्मूला अगली निर्धारित टोल शुल्क संशोधन प्रक्रिया से लागू होगा। वहीं, कंसेशन मॉडल (PPP) पर संचालित टोल प्लाजा पर यह नियम तब लागू होगा, जब उनकी रियायत अवधि समाप्त हो जाएगी या परियोजना दोबारा NHAI को सौंप दी जाएगी। इसके अलावा, भविष्य में शुरू होने वाले नए टोल प्लाजा पर यह फॉर्मूला टोल वसूली शुरू होने के पहले दिन से ही लागू रहेगा।
