New Rules For SIM Card: सिम फ्रॉड के बढ़ते मामले को देखते हुए, टेलीकॉम डिपॉर्टमेंट ने सख्ती कर दी है। अब डीलर्स फटाफट सिम नहीं दे पाएंगे। उन्हें एकस्ट्रा वैरिफिकेशन के प्रॉसेस से गुजरना होगा। इसके लिए टेलीकॉम कंपनियों पर भी अतिरिक्त जिम्मेदारी लगाई गई है। जिससे डीलर किसी भी फ्रॉड करने वाले व्यक्ति को सिम नहीं दे सके। इन कदमों से टेलीकॉम डिपॉर्टमेंट की कोशिश है कि मोबाइल सिम के जरिए होने वाले फ्रॉड को रोका जाय। नई प्रक्रिया में टेलीकॉम कंपनियों और डीलर की जवाबदेही बढ़ जाएगी। नए नियम 10 अक्टूबर से लागू होंगे।
सिम खरीदना होगा मुश्किल
क्या हो सकते हैं बदलाव
इसके तहत टेलीकॉम कंपनियों को सिम विक्रेताओं के रजिस्ट्रेशन और वैरिफिकेशन का मजबूत करना होगा। उसके बाद ही कोई सिम की बिक्री कर पाएगा। बिना रजिस्ट्रेशन और वैरिफिकेशन के लिए सिम बिक्री की अनुमति नहीं होगी। सिम विक्रेता का बॉयोमेट्रिक और आधार के साथ ई-केवाईसी वैरिफिकेशन जरूरी होगा। अगर कोई टेलीकॉम कंपनी ऐसा नहीं करेगी जो उस पर जुर्माना भी लगेगा।
कैसे होता है फ्रॉड
असल में डिपॉर्टमेंट ऑफ टेलिकॉम को लगता है कि सिम विक्रेता का सही तरीके से केवाईसी और रजिस्ट्रेशन नहीं होने का साइबर अपराधी फायदा उठाते हैं। और वह फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम खरीदकर फ्रॉड करते हैं। इसे रोकने के लिए सिम विक्रेता का वैरिफिकेशन और रजिस्ट्रेशन जरूरी है। इसके तहत सिम विक्रेता को कॉरपोरेट आइडेंटिटी नंबर, पता, स्थानीय पता जैसी अहम जानकारी भी देनी होगी। रजिस्ट्रेशन के बास सभी सिम विक्रेता का POS ID भी बनेगा। और वैलिड POS ID वाले ही नए सिम जारी कर सकेंगे।
