आजकल खाना बनाने के लिए ज्यादातर घरों में LPG गैस सिलेंडर का इस्तेमाल होता है। वहीं, कई शहरों में लोगों के घरों तक पाइप के जरिए PNG गैस भी पहुंचाई जा रही है। दोनों ही गैस से खाना जल्दी बन जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि LPG और PNG में से कौन सी गैस ज्यादा ज्वलनशील होती है? अगर दोनों में से किसी एक गैस का रिसाव होने लगे, तो कौन सी गैस ज्यादा खतरा पैदा कर सकती है?
एलपीजी और पीएनजी दोनों ही तरह गैस ज्वलनशील होती हैं।
दरअसल, दोनों गैस में आग लगने और विस्फोट होने का खतरा रहता है। हालांकि, इनकी बनावट, हवा में फैलने के तरीके और रिसाव के बाद जमा होने की स्थिति में अंतर होता है। ऐसे में दोनों गैसों के बीच का फर्क समझना और सुरक्षा के सही तरीके जानना बेहद जरूरी है।
LPG और PNG में कौन सी गैस होती है?
सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि LPG और PNG की बनावट अलग-अलग होती है। LPG का पूरा नाम लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस है। इसमें मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन गैस होती हैं। इसे दबाव के जरिए सिलेंडर में तरल रूप में रखा जाता है। वहीं, PNG का पूरा नाम पाइप्ड नेचुरल गैस है। इसमें मुख्य रूप से मीथेन होती है और इसे पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंचाया जाता है।
दोनों गैसें रंगहीन होती हैं और इनमें आमतौर पर रिसाव का पता लगाने के लिए खास गंध वाला पदार्थ मिलाया जाता है। इस वजह से गैस लीक होने पर अक्सर सड़े अंडे जैसी तेज गंध महसूस हो सकती है। हालांकि, गंध न आने का मतलब यह नहीं है कि गैस का रिसाव नहीं हो रहा है।
LPG और PNG में कौन सी गैस है ज्यादा ज्वलनशील?
ज्वलनशीलता की बात करें तो LPG और PNG दोनों ही आग पकड़ सकती हैं और कुछ परिस्थितियों में विस्फोट का कारण बन सकती हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि इनमें से एक गैस हर स्थिति में दूसरी से ज्यादा खतरनाक है। दोनों गैसों को जलने के लिए हवा में सही मात्रा में ऑक्सीजन और किसी चिंगारी या आग के स्रोत की जरूरत होती है। LPG में मौजूद प्रोपेन और ब्यूटेन हवा के साथ मिलकर ज्वलनशील मिश्रण बना सकते हैं। इसी तरह PNG में मौजूद मीथेन भी हवा के साथ मिलकर आग पकड़ सकती है। असल खतरा गैस के रिसाव की मात्रा, बंद जगह, हवा आने-जाने की सुविधा और गैस कितनी देर तक जमा रही, इन बातों पर निर्भर करता है। इसलिए किसी भी गैस के रिसाव को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
गैस लीक होने पर कौन सी गैस ज्यादा खतरनाक हो सकती है?
LPG और PNG के बीच एक बड़ा अंतर यह है कि रिसाव होने पर ये हवा में किस तरह फैलती हैं। LPG हवा से भारी होती है, इसलिए इसका रिसाव होने पर गैस फर्श के पास, निचले हिस्सों या गड्ढों में जमा हो सकती है।
दूसरी ओर, PNG में मौजूद मीथेन हवा से हल्की होती है और आमतौर पर ऊपर की तरफ फैलती है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि PNG सुरक्षित है। बंद कमरे में इसका रिसाव भी खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है और चिंगारी मिलने पर आग या विस्फोट हो सकता है। यानी LPG और PNG दोनों में खतरा है, बस रिसाव के बाद इनके फैलने का तरीका अलग है।
LPG और PNG में से कौन सी गैस है ज्यादा सुरक्षित?
अगर सुरक्षा की बात करें, तो दोनों गैसों का सही तरीके से इस्तेमाल करने पर जोखिम कम किया जा सकता है। PNG में सिलेंडर को बार-बार बदलने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि गैस पाइपलाइन के जरिए आती है। वहीं, LPG सिलेंडर का इस्तेमाल करते समय रेगुलेटर, पाइप और कनेक्शन की नियमित जांच करना जरूरी है। लेकिन PNG की पाइपलाइन होने का मतलब यह नहीं है कि उसमें रिसाव नहीं हो सकता।
दोनों ही गैसों के उपकरण सही हालत में होने चाहिए और घर में उचित वेंटिलेशन होना चाहिए। गैस की गंध आने पर तुरंत सावधानी बरतनी चाहिए और किसी भी तरह की चिंगारी पैदा करने वाली गतिविधि से बचना चाहिए।
