ट्रेन में कन्फर्म टिकट नहीं मिलने पर RAC टिकट यात्रियों के लिए काफी काम आता है। RAC यानी Reservation Against Cancellation टिकट पर यात्री को ट्रेन में सफर करने की अनुमति होती है, लेकिन शुरुआत में पूरी बर्थ कन्फर्म नहीं होती। ऐसे में अगर यात्रा का प्लान बदल जाए और RAC टिकट कैंसिल कराना हो, तो यह जानना जरूरी है कि रेलवे कितना पैसा काटता है और रिफंड के लिए कितने समय तक टिकट कैंसिल किया जा सकता है।
RAC टिकट कैंसिल कराने पर कितना कटता है?
RAC टिकट कैंसिल कराने पर कितना कटता है?
रेलवे के मौजूदा रिफंड नियमों के मुताबिक, RAC टिकट को ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से 30 मिनट पहले तक कैंसिल कराने पर किराए में से क्लर्केज चार्ज काटकर बाकी रकम वापस की जाती है। RAC और वेटिंग टिकट के लिए यह चार्ज प्रति यात्री 60 रुपये है। AC क्लास के मामले में इस पर लागू GST भी लिया जाता है यानी अगर किसी यात्री के पास RAC टिकट है और वह समय रहते इसे कैंसिल कराता है, तो पूरे किराए की रकम नहीं कटती। सिर्फ निर्धारित क्लर्केज चार्ज काटकर बाकी किराया वापस किया जाता है।
30 मिनट से कम समय बचा है तो रिफंड नहीं
RAC टिकट कैंसिल कराने में समय का खास ध्यान रखना जरूरी है। रेलवे के नियम के अनुसार ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान से 30 मिनट पहले के बाद RAC टिकट पर कोई रिफंड नहीं मिलता। ई-टिकट के मामले में टिकट ऑनलाइन कैंसिल करना या निर्धारित समय के भीतर ऑनलाइन TDR फाइल करना जरूरी है। इसलिए अगर ट्रेन शाम 6 बजे रवाना होने वाली है, तो RAC टिकट से रिफंड पाने के लिए उसे कम से कम शाम 5:30 बजे तक कैंसिल कराना होगा।
RAC टिकट कन्फर्म हो गया तो नियम बदल जाएगा
एक और जरूरी बात यह है कि अगर चार्ट तैयार होने से पहले RAC टिकट कन्फर्म हो जाता है और यात्री को पूरी बर्थ मिल जाती है, तो टिकट को कन्फर्म रिजर्वेशन वाला टिकट माना जाएगा। इसके बाद कैंसिलेशन पर RAC टिकट के बजाय कन्फर्म टिकट के लिए लागू नियमों के हिसाब से शुल्क काटा जाएगा।
ऑनलाइन टिकट वालों को क्या करना होगा?
IRCTC से बुक किए गए RAC ई-टिकट को निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन कैंसिल किया जा सकता है। रेलवे के नियमों के मुताबिक RAC ई-टिकट के लिए ऑनलाइन कैंसिलेशन की सुविधा निर्धारित प्रस्थान समय से 30 मिनट पहले तक रहती है। इसलिए RAC टिकट कैंसिल कराने का फैसला है तो आखिरी समय का इंतजार करने के बजाय पहले ही टिकट कैंसिल कर देना बेहतर है। इससे नियम के मुताबिक रिफंड मिलने की संभावना बनी रहती है।
