नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने 2026-27 के लिए दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की टोल दरों में करीब 5% की बढ़ोतरी की है। 1 अप्रैल से लागू होने वाली नई दरों के तहत दिल्ली से मेरठ तक रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को अब थोड़ा ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। यह बढ़ोतरी भले ही छोटी लगे, लेकिन नियमित यात्रियों के लिए इसका असर जेब पर साफ दिखेगा।
नए टोल रेट क्या हैं
सराय काले खां से मेरठ (करीब 82 किमी) तक कार, जीप और वैन के लिए वन-वे टोल ₹170 से बढ़ाकर ₹175 कर दिया गया है, जबकि रिटर्न यात्रा ₹265 हो गई है। वहीं लाइट कमर्शियल व्हीकल और मिनीबस के लिए वन-वे टोल ₹275 से बढ़कर ₹285 और रिटर्न ₹425 कर दिया गया है। इंदिरापुरम से मेरठ के बीच यात्रा करने वालों पर भी असर पड़ा है, जहां कार का वन-वे टोल ₹120 और रिटर्न ₹189 कर दिया गया है। बस, ट्रक और मल्टी-एक्सल वाहनों के लिए भी टोल बढ़ाया गया है।
रोजाना यात्रियों पर बढ़ेगा बोझ
जो लोग रोजाना दिल्ली-मेरठ के बीच यात्रा करते हैं, उनके लिए यह बढ़ोतरी धीरे-धीरे बड़ा खर्च बन जाती है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति हफ्ते में 5 दिन अप-डाउन करता है, तो उसे महीने में करीब ₹5,300 टोल देना पड़ेगा। ₹10 की बढ़ोतरी भी हर महीने ₹200-₹250 अतिरिक्त खर्च जोड़ देती है, जो साल भर में ₹2,500 से ज्यादा हो सकता है।
डिजिटल टोल सिस्टम लागू
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर अब पूरी तरह डिजिटल टोल सिस्टम लागू कर दिया गया है यानी भुगतान केवल FASTag या UPI के जरिए ही किया जा सकेगा। इससे टोल प्लाजा पर लगने वाला समय कम होगा और फ्यूल की बचत होगी, लेकिन जिन वाहनों में FASTag या डिजिटल पेमेंट की सुविधा नहीं है, उन्हें परेशानी या पेनल्टी का सामना करना पड़ सकता है।
ट्रैफिक और डिमांड बनी हुई मजबूत
यह एक्सप्रेसवे क्षेत्र के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है, जहां रोजाना करीब 3.98 लाख पैसेंजर कार यूनिट (PCU) का आवागमन होता है। इसमें से लगभग 50,000 PCU केवल एक्सप्रेसवे का उपयोग करते हैं। इससे साफ है कि टोल बढ़ने के बावजूद लोग तेज और सुविधाजनक यात्रा को प्राथमिकता दे रहे हैं।
क्या बदलनी होगी आपकी यात्रा रणनीति?
हर साल बढ़ती टोल दरों को देखते हुए यात्रियों को अपनी यात्रा योजना पर फिर से विचार करना पड़ सकता है। कारपूलिंग से खर्च बांटा जा सकता है, या हाइब्रिड यात्रा (कुछ दूरी पब्लिक ट्रांसपोर्ट से) अपनाई जा सकती है। कुछ कंपनियां ट्रैवल अलाउंस या वर्क फ्रॉम होम जैसे विकल्प भी देती हैं, जिससे खर्च कम किया जा सकता है।
