Daughters' Property Rights: क्या शादी के बाद खत्म हो जाता है पिता की संपत्ति पर हक? जानें कब भाई के बराबर मिलता है हक और कब खाली रह जाते हैं हाथ?

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  • Updated Mar 26, 2026, 11:38 AM IST

क्या शादी के बाद पिता की प्रॉपर्टी पर हक खत्म हो जाता है? 2005 के कानूनी बदलाव के बाद, बेटियां अब जन्मजात उत्तराधिकारी हैं। पैतृक संपत्ति में उन्हें भाई के बराबर हिस्सा मिलता है, लेकिन पिता की खुद की कमाई हुई संपत्ति पर नियम अलग हैं।

भारत में बेटियों के संपत्ति अधिकारों को लेकर समाज में आज भी कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं। अक्सर यह माना जाता है कि बेटी की शादी हो जाने के बाद उसका अपने पिता के घर या संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं रहता। लेकिन कानूनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 ने बेटियों की स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। अब कानून की नजर में बेटी चाहे शादीशुदा हो या अविवाहित, उसका हक उसके भाई के ठीक बराबर होता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में बेटियों को संपत्ति में हिस्सा मिलता है और कब उनके हाथ खाली रह सकते हैं।

Daughter Property Right

2005 का ऐतिहासिक बदलाव और 'को-पार्सनर' का अधिकार

साल 2005 से पहले, बेटियों को पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) में बेटों के समान अधिकार नहीं मिलते थे। लेकिन 9 सितंबर 2005 को लागू हुए नए कानून के बाद, बेटियों को 'को-पार्सनर' (Coparcener) यानी समान उत्तराधिकारी का दर्जा दिया गया। इसका मतलब यह है कि एक बेटी का अपने पिता की पैतृक संपत्ति पर जन्म से ही उतना ही अधिकार है जितना कि एक बेटे का। सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया फैसलों में यह भी साफ कर दिया है कि इस अधिकार के लिए यह जरूरी नहीं है कि 2005 में पिता जीवित थे या नहीं। यदि संपत्ति पैतृक है, तो बेटी अपना हिस्सा कभी भी मांग सकती है।

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