गांव में ही बनेगा बच्चों का आधार कार्ड, अब 18+ उम्र वालों के लिए भी आसान हुई प्रक्रिया, जानें नए नियम

यदि आपके क्षेत्र में ग्राम पंचायत स्तर पर आधार सेवा उपलब्ध है, तो पहले वहीं संपर्क करें। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी और ग्रामीण परिवारों को आधार से जुड़ी सेवाएं अपने गांव में ही आसानी से मिल सकेंगी।

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) आधार सेवाओं को देश के हर कोने तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में अब कई राज्यों में बच्चों का आधार कार्ड (बाल आधार) गांव स्तर पर ही बनाने की सुविधा शुरू की जा रही है। इसके तहत ग्राम पंचायत, डाकघर और आधार सेवा केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को अपने बच्चों का आधार बनवाने के लिए शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वहीं, 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए भी आधार से जुड़े जरूरी अपडेट और सेवाओं को अधिक सुलभ बनाया जा रहा है।

baal aadhaar

गांव में ऐसे बनवा सकते हैं बच्चों का आधार कार्ड

5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अलग है प्रक्रिया

UIDAI के नियमों के अनुसार, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए बनने वाले आधार कार्ड को 'बाल आधार' कहा जाता है। इस दौरान बच्चे के फिंगरप्रिंट और आंखों की पुतली (आईरिस) का बायोमेट्रिक डेटा नहीं लिया जाता। केवल बच्चे की फोटो ली जाती है और उसका आधार माता या पिता में से किसी एक के आधार नंबर से लिंक किया जाता है। जब बच्चा 5 वर्ष का हो जाता है, तब उसका बायोमेट्रिक अपडेट कराना जरूरी होता है। इसके बाद 15 वर्ष की आयु पूरी होने पर दोबारा बायोमेट्रिक अपडेट कराया जाता है।

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