बिना रजिस्ट्री फ्लैट खरीदना कितना जोखिम भरा? जानिए कानूनी हक और मालिकाना अधिकार से जुड़े जरूरी नियम

Flat Buyer Rights: सेल डीड रजिस्टर्ड न होने पर पूरा भुगतान और कब्जे के बाद भी खरीदार को कानूनी मालिकाना हक नहीं मिलता। अधिकारों की सुरक्षा और विवादों से बचने हेतु 4-8 महीनों में रजिस्ट्री जरूरी है।

Flat Buyer Rights : घर खरीदना किसी भी व्यक्ति के जीवन के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण वित्तीय फैसलों में से एक होता है। जीवनभर की कमाई लगाकर आशियाना खरीदने के बाद लोग उसमें रहने भी लगते हैं, लेकिन कई बार कागजी प्रक्रिया या लापरवाही के कारण 'सेल डीड' यानी बिक्री विलेख का पंजीकरण नहीं हो पाता है। अगर आपने भी फ्लैट का पूरा भुगतान कर दिया है और उसपर आपका कब्जा भी है, लेकिन रजिस्ट्री नहीं हुई है, तो कानून की नजर में आप उस संपत्ति के असली मालिक नहीं बने हैं। भारतीय संपत्ति कानून के मुताबिक, ऐसी स्थिति में फ्लैट का कानूनी मालिकाना हक बिल्डर या मूल विक्रेता के पास ही रहता है।

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फ्लैट खरीद लिया लेकिन नहीं कराई रजिस्ट्री? जानिए कानूनी पेचीदगियां और आपके अधिकार

कानूनी रूप से क्या हैं अधिकार और क्या नहीं?

जब तक सेल डीड रजिस्टर्ड नहीं होती, तब तक खरीदार के पास संपत्ति का पूरा मालिकाना हक नहीं आता है। अगर आपने केवल एग्रीमेंट टू सेल किया है, तो इसका मतलब है कि आपके पास भविष्य में फ्लैट खरीदने का अधिकार तो है, लेकिन आप वर्तमान में उसके कानूनी मालिक नहीं हैं। वहीं, अगर सेल डीड पर हस्ताक्षर तो हो चुके हैं लेकिन उसका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है, तो खरीदार का टाइटल अधूरा माना जाता है। ऐसे मामलों में खरीदार के पास संपत्ति पर कई तरह के कानूनी अधिकार सुरक्षित नहीं रहते हैं और वह कई महत्वपूर्ण लाभों से वंचित हो जाता है।

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