Jhalana Leopard Safari Park: जयपुर घूमने गए हैं तो बस यहां से थोड़ी दूर यात्रा करके आप ऐसी जगह पहुंच जाएंगे जहां गाड़ियों का शोर धीरे-धीरे गायब हो जाता है और उसकी जगह ले लेती है सूखी पत्तियों की सरसराहट और जंगल में गूंजती हिरणों की चेतावनी भरी आवाजें। पथरीली पहाड़ियां, झाड़ियों से भरा इलाका और धूल भरे रास्ते। हम बात कर रहे हैं झालाना लेपर्ड सफारी पार्क की जो भारत के सबसे खास शहरी वन्यजीव स्थलों में से एक है। अगर आप जयपुर आए हैं और कुछ अलग, शांत और रोमांचक अनुभव चाहते हैं, तो झालाना की सफारी जरूर करें।
रोमांचक जंगल सफारी
जयपुर शहर के किनारे ही बसा यह पार्क कुछ ही घंटों में जबरदस्त रोमांच दे देता है। यात्रा के दौरान यहां आपको जंगली तेंदुए को करीब से देखने का मौका मिल सकता है। गौर करने वाली बात ये है कि बड़े-बड़े टाइगर रिजर्व की तरह यहां जाने के लिए कई दिन की प्लानिंग या लंबी जंगल यात्राओं की जरूरत नहीं पड़ती।
झालाना की सबसे बड़ी पहचान यहां के तेंदुए हैं। करीब 23 वर्ग किलोमीटर के इस छोटे से इलाके में तेंदुओं की अच्छी-खासी संख्या है। इसलिए यहां तेंदुआ दिखने की संभावना काफी ज्यादा रहती है। कई बार तो वे आराम से पगडंडी पार करते, चट्टानों पर बैठे या पेड़ों की छांव में सुस्ताते नजर आ जाते हैं।
यह इलाका प्राचीन अरावली पर्वतमाला का हिस्सा है। यहां घने जंगल नहीं, बल्कि सूखे पर्णपाती पेड़, झाड़ियां और पत्थरीली पहाड़ियां मिलती हैं। सुबह के समय जब सूरज की किरणें चट्टानों पर पड़ती हैं, तो पूरा इलाका सुनहरी चमक से जगमगा उठता है। वहीं शाम के वक्त डूबते सूरज की रोशनी में जंगल का रंग और भी खूबसूरत लगने लगता है।
बता दें कि यहां सफारी दो समय पर होती है सुबह और दोपहर बाद। सुबह की सफारी में ठंडी हवा, पक्षियों की चहचहाहट, मोरों का नाच और चीतलों के झुंड देखने को मिलते हैं। शाम की सफारी का मजा अलग ही होता है, क्योंकि इसी समय तेंदुए ज्यादा सक्रिय होते हैं। ढलती रोशनी में उनकी हर हलचल और भी रोमांचक लगती है। सफारी आमतौर पर 2 से 3 घंटे की होती है, जो जयपुर घूमने के प्लान के साथ आसानी से फिट हो जाती है।
तेंदुए यहां का मुख्य आकर्षण हैं, लेकिन झालाना का जंगल और भी कई जानवरों का घर है। यहां चीतल, नीलगाय, रेगिस्तानी लोमड़ी, सुनहरा सियार, धारीदार लकड़बग्घा और भारतीय ताड़ सिवेट भी देखे जा सकते हैं। पक्षी प्रेमियों के लिए भी यह जगह खास है चितकबरी चील, शिकरा, मोर, उल्लू और सर्दियों में आने वाले कई प्रवासी पक्षी यहां नजर आ जाते हैं।
