Khonoma Village Nagaland (खोनोमा गांव नागालैंड): घूमने फिरने के शौकीन लोगों के लिए वैसे तो भारत का कोना कोना स्वर्ग सा सुंदर है। लेकिन भारत का पूर्वी हिस्सा अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और साधारण रहन सहन से हमेशा के लिए आपके मन में बस जाएगा। पूर्वोत्तर भारत का एक ऐसा ही गांव है, जो अपनी प्राकृतिक खूबसूरती तो अपने सच्चे साधारण लोगों के लिए काफी चर्चा में है। अगर आप भी ट्रेवलिंग के शौकीन है, तो देश के ऐसे अनोखे गांव में जाना ही चाहिए, जहां के लोगों ने समाज और प्रकृति के लिए एक अनूठा उदाहरण सेट किया गया है
भारत का सबसे ईमानदार गांव
भारत में कई ऐसी जगहें हैं, जो अपनी एतिहासिक धरोहर के लिए जानी जाती हैं। लेकिन भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य नागालैंड का एक गांव अपने लोगों की ईमानदारी के लिए जाना जाता है। ये नागालैंड में भारत-म्यांमार बॉर्डर पर खोनोमा गांव है।, जो वर्षों से अपनी प्राकृतिक सुंदरता तो ईमानदारी के लिए मशहूर है। ये स्वर्ग सी जगह केवल हरियाली तक सीमित नहीं है, बता दें कि यहां पर लोग अपनी दुकानों को बिना किसी ताले या सुरक्षा के चलाते हैं।
खोनोमा गांव की दुकानों में आपको अक्सर ही दुकानदार भी बैठे नहीं मिलेंगे न ही ये लोग अपनी दुकान में लॉक लगाते हैं। यहां के लोग इतने ईमानदारी है कि, ग्राहक खुद दुकान से सामान लेकर जाते हैं और पैसे डिब्बे में रख देते हैं। यह प्रथा खोनोमा में पीढ़ियों से चली आ रही है और आज तक किसी ने इस सामुदायिक विश्वास को नहीं तोड़ा है।
नहीं हुई चोरी
खोनोमा की खासियत ही यही है कि, यहां पर आज तक कोई चोरी या अपराध दर्ज नहीं हुआ है। सालों से यहां के लोग एक दूसरे पर विश्वास कर अपना गुजारा कर रहे हैं। जो सिखाता है कि, कैसे जीवन यापन करने के लिए निस्वार्थ भाव और ईमानदारी होनी चाहिए।
भारत का सबसे पहला हरित गांव
खोनोमा को भारत का सबसे पहला ग्रीन गांव भी कहा जाता है। ग्रीन विलेज वो होती है, जहां पर सब कुछ पर्यावरण के अनुकूल किया जाता है। पेड़ों की कटाई, जानवरों का शिकार यहां पर कुछ नहीं होता है। हालांकि पहले यहां की जंगली जानवरों का शिकार हुआ करता था। लेकिन सरकार द्वारा 1998 में खोनोमा नेचर कन्जर्वेशन सेंचुरी बनवाई गई। जिसके बाद यहां पर शिकार पर रोक लगी और हरियाली को बढ़ावा मिला। इससे यहां रहने वाले लोगों का जीवनस्तर भी बदला। वर्तमान में यहां पर करीब 500 घर हैं, जिनमें करीब 2 हजार लोगों की आबादी रहती है।
देश गांव की प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली देखने के लिए दूर दूर से पर्यटक आते हैं। और प्रकृति के बीच सुकून के कुछ पल बिताते हैं। यहां के लोगों का मानना है कि, वे पर्यावरण के साथ साथ पर्यटन को बढ़ावा देंगे। और अपनी स्थानीय जगह को खूबसूरत और अपनी आगे आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वर्ग सा सुंदर बनाएंगे।
कैसे पहुंचे खोनोमा
खोनोमा गांव नागालैंड की राजधानी कोहिमा से करीब करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस हरित गांव में पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले डिमापुर हवाई अड्डे या रेलवे स्टेशन तक पहुंचना होगा, जो नागालैंड का प्रमुख प्रवेश द्वार है। डिमापुर से कोहिमा तक टैक्सी या बस की सेवाएं उपलब्ध हो जाएगी। जिसे पूरे करने में आपको करीब 3 घंटे का समय लगत सकता है। कोहिमा से आप लोकल टैक्सी या शेयरिंग वाली जीप लेकर आसानी से खोनोमा गांव पहुंच सकते हैं।
