Keoladeo National Park: केवलादेव नेशनल पार्क हर साल सर्दियों के मौसम में नेचर लवर्स विशेष रूप से बर्ड लवर्स, का ध्यान खींचता है। यहां 370 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं जो इसे यूनीक और अनूठा ट्रैवल डेस्टिनेशन बनाती है। केवलादेव नेशनल पार्क की बनावट कुछ इस तरह की है कि जगह-जगह अलग-अलग गहराई वाले छोटे-छोटे तालाब बने हुए हैं।
केवलादेव नेशनल पार्क
इसी वजह से कई तरह की पक्षी प्रजातियां यहां आराम से रह पाती हैं। यूनेस्को के मुताबिक, यह पार्क मीडिल ईस्ट से आने वाले प्रवासी पक्षियों के रास्ते पर पड़ता है और यहां पानी भी भरपूर मिलता है।सर्दियों में यहाँ बत्तखें, कलहंस, कूट, पेलिकन और कई जलचरी पक्षी बड़ी संख्या में आते हैं। सबसे खास बात यह है कि गंभीर रूप से लुप्तप्राय साइबेरियाई सारस के लिए यह दुनिया में एकमात्र जाना-पहचाना शीतकालीन ठिकाना है।
केवलादेव नेशनल पार्क घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का महीना बेस्ट होता है। इस बीच हजारों पक्षियों का यहां जमावड़ा होता है, जिससे यह जगह बेहद जीवंत हो उठती है। यह एक ऐसा अनुभव है जो आपको पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर देगी। यदि आप पक्षियों के बारे में अधिक जानना चाहते हैं, तो भी ये यात्रा आपके लिए स्पेशल होगी।
बता दें कि यूनेस्को द्वारा केवलादेव नेशनल पार्क को विश्व धरोहर की मान्यता मिली हुई है। यह केवल एक सम्मान का प्रतीक नहीं है यह पार्क के वैश्विक पारिस्थितिकीय महत्व को भी दर्शाती है। सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक ये पार्क खुला रहता है। भारतीय टूरिस्ट के लिए एंट्री फीस ₹75 है वहीं विदेशी टूरिस्टों के लिए ₹500 है।
