कल्पना कीजिए किसी ऐसे शहर कि जो चारों तरफ से पानी से घिरा हो। दूर-दूर तक नीला समुद्र नजर आता हो। क्या हो कि आप वहां जाएं और पाएं कि जहां समुद्र हुआ करता था वहां सिर्फ सूखी रेत बची हुई है। आज वहां समुद्र का नामोनिशान तक नहीं है। आज वहां जंग लगे जहाज खड़े हैं। यही सब हकीकत है उज्बेकिस्तान के कराकलपाकस्तान इलाके में मौजूद मोयनाक की।
कजाकिस्तान के मोयनाक में सूखा समुद्र देखने पहुंचते हैं लोग (Photo: iStock)
कभी यह शहर सागर किनारे बसा एक व्यस्त मछली पकड़ने वाला बंदरगाह था। आज यहां आने वाले पर्यटक उस जगह को देखने आते हैं जहां कभी समुद्र हुआ करता था।
जोरों पर चलता था मछली का कारोबार
अरल सागर कभी दुनिया की सबसे बड़ी अंतर्देशीय जलराशियों में शामिल था। मोयनाक इसके दक्षिणी किनारे पर बसा था और यहां की अर्थव्यवस्था मछली पकड़ने और उससे जुड़े कारोबार पर निर्भर थी। शहर में बंदरगाह था, मछलियों के प्रोसेसिंग की फैक्ट्रियां थीं और बड़ी संख्या में लोग इसी उद्योग से अपनी रोजी-रोटी कमाते थे।
धीरे-धीरे बदलने लगा सब
1960 के दशक में सोवियत संघ ने अमू दरिया और सिर दरिया नदियों के पानी का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर खेती, खासकर कपास की सिंचाई के लिए करना शुरू किया। इसका सीधा असर अरल सागर पर पड़ा। समुद्र तक पहुंचने वाला पानी कम होता गया और उसकी सतह तेजी से नीचे जाने लगी।
पीछे हटता गया समुद्र
समय के साथ अरल सागर की तटरेखा मोयनाक से इतनी दूर चली गई कि शहर का समुद्र से रिश्ता लगभग खत्म हो गया। 1980 और 1990 के दशक तक यहां का मछली उद्योग बुरी तरह टूट चुका था।
वहीं रह गए जहाज
आज दर्जनों जंग लगे जहाज उस जमीन पर पड़े दिखाई देते हैं, जो कभी समुद्र की तलहटी थी। यही जगह अब मॉयनाक शिप ग्रेवयार्ड या ‘शिप्स सेमेट्री’ के नाम से मशहूर है। समुद्र के गायब होने की यह तस्वीर देखने के लिए फोटोग्राफर, पर्यटक और पर्यावरण में रुचि रखने वाले लोग यहां पहुंचते हैं।
जहां कभी पानी था, वहां अब रेगिस्तान है
मोयनाक के आसपास का इलाका अब अरलकुम रेगिस्तान का हिस्सा बन चुका है। कभी बंदरगाह रहे इलाके में आज लोग पैदल घूम सकते हैं और उस सूखी जमीन को देख सकते हैं, जिसके नीचे कभी समुद्र था।
यहां आने वाले पर्यटक जहाजों के कब्रिस्तान के अलावा संग्रहालयों में उस दौर की तस्वीरें और इतिहास भी देख सकते हैं, जब अरल सागर इस शहर की जिंदगी का केंद्र हुआ करता था। उज्बेकिस्तान के पर्यटन से जुड़े स्रोत भी पूर्व बंदरगाह, अरलकुम रेगिस्तान और अरल सागर से जुड़े संग्रहालयों को यहां के प्रमुख आकर्षणों में गिनाते हैं।
मोयनाक की कहानी का सबसे अजीब पहलू यही है कि जिस पर्यावरणीय त्रासदी ने शहर की अर्थव्यवस्था और जीवन को बदल दिया, वही आज उसके पर्यटन की सबसे बड़ी वजह बन गई है। यहां संगीत, कला और विज्ञान महोत्सव भी आयोजित होता है। शिप ग्रेवयार्ड के आसपास होने वाला यह आयोजन कला और संगीत के जरिए अरल सागर की पर्यावरणीय तबाही की ओर ध्यान खींचता है।
मोयनाक के सूखे रेत पर पड़े जहाज उस दौर की याद दिलाते हैं जब समुद्र लोगों की जिंदगी का हिस्सा था। आज वही जहाज उस समुद्र की गैरमौजूदगी के गवाह हैं।
