देश के प्राचीनतम नगरों में से एक उज्जैन धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक आस्था का एक बड़ा केंद्र है। सैकड़ों-हजारों वर्षों से यह नगर हिंदू आस्था का केंद्र रहा है। ज्योतिष एवं तंत्र साधना के लिए इसकी अपनी पौराणिक मान्यताएं एवं धारणाएं हैं। हिंदू धार्मिक ग्रंथों में इसे देवताओं का शहर बताया गया है। स्कंदपुराण की मानें तो उज्जैन में 84 महादेव, 64 योगिनियां, 8 भैरव और 6 विनायक विराजमान हैं। कहते हैं कि यहां भगवान शिव साकार एवं निराकार दोनों रूपों में मौजूद हैं। पुराणों में कहा गया है कि महाकाल की स्थापना ब्रह्मा जी ने की। उज्जैन की इस सांस्कृतिक विरासत एवं प्राचीन गौरव को दुनिया के सामने लाने के लिए भारत सरकार ने महाकाल कॉरिडोर का निर्माण कराया है।
तीन साल में बनकर तैयार हुआ यह कॉरिडोर दिव्य, अनूठा एवं भव्य है। यह कॉरिडोर उज्जैन के पुराने वैभव एवं गौरव को फिर से पुनर्स्थापित करेगा। कॉरिडोर में भगवान शिव से जुड़ी अलग-अलग कहानियां बताई गई हैं। यहां सप्त ऋषि भी हैं। यहां भगवान शिव का समस्त परिवार नंदीगण, भैरव, गणेशजी, माता पार्वती के साथ-साथ अन्य देवताओं की 200 मूर्तियां बनाई गई हैं। शिव पुराण की कहानियों को दर्शाने वाले 50 से ज्यादा भित्ति चित्र भी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को इस कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद मंदिर का यह कॉरिडोर आम श्रद्धालुओं एवं भक्तों के दर्शन के लिए खुल जाएगा।