एलन मस्क के सैटेलाइट इंटरनेट Starlink की खूब चर्चा थी। कहा जा रहा था कि Starlink के आने के बाद भारत का टेलीकॉम सेक्टर पूरी तरह से बदल जाएगा, हालांकि ये बातें तब होंगी जब Starlink की सर्विस भारत में शुरू होगी। करीब 6 महीने पहले रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया था कि Starlink को भारत सरकार की ओर से मंजूरी मिल गई है और जल्द ही सेवाएं शुरू होंगी, लेकिन 6 महीने बाद भी Starlink का कोई अतापता नहीं है।
Starlink
जियो और एयरटेल के साथ साझेदारी
भारत सरकार ने कुछ महीने कहा था कि सैटेलाइट ब्रॉडबैंड को देशभर में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए Starlink, Reliance Jio और OneWeb को सैटेलाइट कम्युनिकेशन लाइसेंस जारी कर दिए हैं। सरकार ने तीनों कंपनियों को लाइसेंस देने के साथ ही उन्हें प्रारंभिक स्पेक्ट्रम आवंटन भी प्रदान कर दिया है। इससे देश में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के तेजी से विस्तार का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन सवाल अब भी वही है कि आखिर कब?
डिजिटल कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव संभव
सरकार का मानना है कि सैटेलाइट ब्रॉडबैंड से दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट पहुंचाना आसान होगा, जहां पारंपरिक नेटवर्क पहुंचने में कठिनाई होती है। इससे डिजिटल इंडिया मिशन को भी मजबूती मिलेगी।
Starlink की भारत में कीमत
पिछले साल दिसंबर में भारत में स्टारलिंक इंटरनेट प्लान की कीमतों का भी ऐलान हुआ था। Starlink की आधिकारिक भारतीय वेबसाइट के अनुसार, स्टारलिंक घरेलू सर्विस की कीमत 8,600 रुपये प्रति माह रखी गई है, वहीं कनेक्शन सेटअप के लिए आवश्यक हार्डवेयर का खर्च 34,000 रुपये होगा। इस प्लान में अनलिमिटेड इंटरनेट डेटा और 30 दिन का ट्रायल पीरियड शामिल होगा।
Starlink इंटरनेट कैसे काम करता है?
Starlink एक सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा है, जिसे एलन मस्क की कंपनी SpaceX ने विकसित किया है। इसका मकसद दुनिया के हर कोने, खासकर दूर-दराज इलाकों में तेज इंटरनेट पहुंचाना है। स्टारलिंक पारंपरिक मोबाइल टावर या फाइबर केबल पर निर्भर नहीं करता। इसके बजाय यह पृथ्वी के चारों ओर घूम रहे हजारों छोटे-छोटे सैटेलाइट्स के नेटवर्क के जरिए काम करता है। ये सैटेलाइट्स लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में होते हैं, यानी जमीन से अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर, जिससे इंटरनेट की स्पीड तेज और लेटेंसी कम रहती है।
यूजर तक इंटरनेट कैसे पहुंचता है
जब आप स्टारलिंक का कनेक्शन लेते हैं, तो आपको एक खास डिश (एंटीना) और राउटर दिया जाता है। यह डिश सीधे ऊपर मौजूद सैटेलाइट से कनेक्ट होती है। सैटेलाइट से सिग्नल ग्राउंड स्टेशन तक जाता है। फिर इंटरनेट डेटा वापस सैटेलाइट के जरिए आपके घर तक पहुंचता है। यह पूरा प्रोसेस बहुत तेजी से होता है, इसलिए यूजर को हाई-स्पीड इंटरनेट मिलता है।
स्पीड और परफॉर्मेंस
स्टारलिंक आमतौर पर 50 Mbps से 250 Mbps तक की स्पीड दे सकता है, जो सामान्य ब्रॉडबैंड के बराबर या कई बार उससे बेहतर होती है। साथ ही, LEO सैटेलाइट्स की वजह से वीडियो कॉलिंग, गेमिंग और स्ट्रीमिंग में भी अच्छा अनुभव मिलता है, हालांकि यह तकनीक पूरी तरह परफेक्ट नहीं है। खराब मौसम (जैसे भारी बारिश या तूफान) में सिग्नल थोड़ा प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा, शुरुआती सेटअप (डिश और उपकरण) की कीमत भी आम इंटरनेट कनेक्शन से ज्यादा हो सकती है।
