Trump Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लागू किए गए Reciprocal Tariff (पारस्परिक टैरिफ) का भारतीय मोबाइल निर्यात पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। नए टैरिफ नियमों के तहत अमेरिका भारत से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन्स पर 26% टैक्स वसूलने की योजना बना रहा है। इससे भारत को आर्थिक रूप से नुकसान हो सकता है, क्योंकि भारत से अमेरिका में निर्यात होने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स पर पहले कोई टैक्स नहीं लगता था।
Trump Tariff
कैसे प्रभावित होगा भारत?
वित्त वर्ष 2024 में भारत से 11.1 बिलियन डॉलर मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट अमेरिका को निर्यात किए गए थे। नए टैरिफ के कारण इन प्रोडक्ट्स की लागत बढ़ सकती है, जिससे अमेरिका में भारतीय मोबाइल फोन की मांग घट सकती है। इसका सीधा असर भारतीय मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों और निर्यात पर पड़ेगा।
Apple को होगा सबसे बड़ा नुकसान
भारत से अमेरिका में निर्यात किए जाने वाले स्मार्टफोन्स में Apple की हिस्सेदारी 70% से अधिक है। Apple ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित कर अमेरिका और अन्य ग्लोबल मार्केट में निर्यात शुरू किया था, लेकिन बढ़े हुए टैरिफ के कारण कंपनी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा चीन भी आईफोन की सबसे ज्यादा आपूर्ति करता है। चीन जहां iPhone निर्माता अपने लगभग 90% प्रोडक्ट का निर्माण करता है, भी 34% टैरिफ का सामना कर रहा है।
जब राष्ट्रपति ट्रम्प ने 2018 में पहली बार चीन पर टैरिफ लगाया, तो एप्पल ने आईपैड और एयरपॉड्स का अधिक प्रोडक्शन वियतनाम में तथा आईफोन का प्रोडक्शन भारत में स्थानांतरित करना शुरू कर दिया। लेकिन अब ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका वियतनाम पर 46 प्रतिशत और भारत पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी का सामना एप्पल को ही करना होगा। टैरिफ बढ़ने से अमेरिका में आईफोन या अन्य एप्पल प्रोडक्ट की कीमत बढ़ सकती है।
भारत के पास क्या रास्ता?
- अमेरिका से बातचीत: भारत को टैरिफ में छूट या किसी नए व्यापार समझौते के लिए अमेरिका से बातचीत करनी होगी।
- अन्य बाजारों की तलाश: भारत को अपनी निर्यात रणनीति में बदलाव लाकर अन्य देशों जैसे यूरोप, मध्य एशिया और दक्षिण अमेरिका में बाजार विकसित करने होंगे।
- घरेलू उत्पादन को बढ़ावा: भारतीय कंपनियों को लोकल मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत करने और वैकल्पिक रणनीतियों पर काम करने की जरूरत होगी।
