कंप्यूटर माउस की दुनिया में शुरुआत दो बटन से हुई थी, लेकिन समय के साथ तीसरे बटन की एंट्री ने यूजर एक्सपीरियंस बदल दिया। 1990 के दशक में खासतौर पर Sun Microsystems और कुछ यूनिक्स-आधारित सिस्टम्स में तीन बटन वाले माउस का इस्तेमाल बढ़ा। इस तीसरे बटन का मुख्य उपयोग टेक्स्ट सिलेक्ट करने, कॉपी-पेस्ट और शॉर्टकट कमांड्स के लिए किया जाता था।
तीन बटन वाला माउस, कब हुआ लॉन्च और क्यों हो गया गायब?
तीन बटन का असली काम क्या था?
तीन बटन वाले माउस में लेफ्ट और राइट क्लिक के अलावा बीच का बटन (मिडिल क्लिक) भी होता था। यह खासतौर पर डेवलपर्स और टेक्निकल यूजर्स के लिए उपयोगी था। उदाहरण के लिए, यूनिक्स सिस्टम में मिडिल क्लिक से टेक्स्ट तुरंत पेस्ट किया जा सकता था, जो आज भी कुछ सिस्टम्स में काम करता है, हालांकि आम यूजर्स के लिए यह फीचर थोड़ा जटिल था और उन्हें इसकी आदत डालने में समय लगता था।
क्यों हुआ कम इस्तेमाल?
जैसे-जैसे Microsoft Windows और Apple के ऑपरेटिंग सिस्टम लोकप्रिय हुए, यूजर इंटरफेस को सरल बनाने पर जोर दिया गया। इन प्लेटफॉर्म्स ने दो बटन या यहां तक कि सिंगल बटन (Mac में) को प्राथमिकता दी, ताकि नए यूजर्स के लिए कंप्यूटर इस्तेमाल करना आसान हो सके। इसके अलावा, तीन बटन वाले माउस को ज्यादा जटिल माना जाने लगा, जिससे आम यूजर इसे अपनाने से बचने लगे।
स्क्रॉल व्हील ने बदल दिया खेल
1990 के दशक के आखिर में माउस में स्क्रॉल व्हील आने लगा, जिसने तीसरे बटन की जगह ले ली। यह व्हील न सिर्फ पेज स्क्रॉल करने में मदद करता था, बल्कि इसे दबाने पर मिडिल क्लिक का काम भी किया जा सकता था। इससे माउस ज्यादा सुविधाजनक और कॉम्पैक्ट बन गया।
क्या पूरी तरह खत्म हो गया तीन बटन माउस?
पूरी तरह नहीं। आज भी कुछ खास प्रोफेशनल्स, जैसे डेवलपर्स और ग्राफिक्स डिजाइनर्स, तीन बटन वाले माउस या एडवांस्ड माउस का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, आम यूजर्स के बीच अब स्क्रॉल व्हील वाला माउस ही स्टैंडर्ड बन चुका है।
